ग्रहण में पट खुले रहने वाला एकमात्र मंदिर

7 सितम्बर को चन्द्र ग्रहण रात्रि 9:57 बजे से लेकर 1:27 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक काल ग्रहण लगने के 12 घंटे पूर्व से प्रारंभ हो जाता है और ग्रहण समाप्ति के साथ समाप्त हो जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार इस समय किसी भी प्रकार का शुभ कार्य, भोजन अथवा शयन वर्जित माना गया है। इसी कारण ग्रहण के समय सभी मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं — चाहे वह हनुमानजी, गणपति जी, रामजी, शिवजी या अन्य किसी देवी-देवता का मंदिर क्यों न हो। इन सब से भिन्न महाप्रभु वल्लभाचार्य जी द्वारा प्रवर्तित पुष्टिमार्गीय परंपरा है। नाथद्वारा सहित देशभर के सभी पुष्टिमार्गीय मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की सेवा बाल स्वरूप में, बाल भाव से की जाती है।यहां मंगला, श्रृंगार, ग्वाल, पलना, राजभोग के बाद उत्थापन आरती और शयन तक प्रभु के सुख को सर्वोपरि मानते हुए वैष्णवजन सेवा में लगे रहते हैं।
ग्रहण के समय देशभर के पुष्टिमार्गीय मंदिरों के पट खुले रहते हैं। इस अवधि में भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों के लिए सहज सुलभ रहते हैं और पूरे ग्रहण काल में दर्शन देकर उन्हें भयमुक्त करते हैं। पुष्टिमार्गीय मंदिर ही ऐसे हैं जो ग्रहण के समय पट बंद नहीं करते। यहाँ भक्तजन ग्रहण के समय भी प्रभु दर्शन का लाभ लेकर भक्ति में लीन हो सकते हैं।
मुकेश नागर
( स्वतंत्र पत्रकार एवं सामयिक विषयों के लेखक हैं)

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