‘ताल’ के सीक्वल को लेकर सुभाष घई का बड़ा बयान
'ताल' के सीक्वल पर सुभाष घई का बड़ा खुलासा: स्क्रिप्ट लगभग तैयार, नई कास्ट के साथ वापसी की तैयारी
मुंबई: साल 1999 की कालजयी फिल्म 'ताल' आज भी सिनेमा प्रेमियों के जेहन में ताजा है। अपनी सादगी, रूहानी संगीत और ऐश्वर्या राय-अक्षय खन्ना की केमिस्ट्री के लिए मशहूर इस फिल्म के सीक्वल को लेकर अब दिग्गज निर्देशक सुभाष घई ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
दर्शकों की मांग और जेन-जी का क्रेज
सुभाष घई ने बताया कि पिछले डेढ़ दशक से प्रशंसक उनसे 'ताल 2' बनाने का आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने कहा:
"पिछले 15 वर्षों से मुझसे एक ही सवाल पूछा जा रहा है कि मैं 'ताल' दोबारा कब बना रहा हूँ? हैरानी की बात यह है कि आज की नई पीढ़ी (जेन-जी) भी इस फिल्म की ऊर्जा से इतनी प्रभावित है कि वे इसके सीक्वल की मांग कर रहे हैं।"
स्क्रिप्ट पर काम पूरा, जल्द शुरू हो सकता है निर्माण
घई ने खुलासा किया कि फिल्म की कहानी और स्क्रिप्ट पर काफी काम हो चुका है। उन्होंने कहा कि 'ताल' का विषय जितना सरल दिखता है, उसे पर्दे पर उतारना उतना ही चुनौतीपूर्ण है।
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तैयारी: सीक्वल की पटकथा लगभग पूरी हो चुकी है।
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पवित्रता का महत्व: निर्देशक के अनुसार, इस फिल्म को बनाने के लिए वह 'प्योरिटी' (पवित्रता) बहुत जरूरी है, जो पहली फिल्म का आधार थी। उन्हें लगता है कि अब इसे बनाने का बिल्कुल सही समय आ गया है।
कास्टिंग को लेकर बड़ी चुनौती
फिल्म की सफलता के लिए सुभाष घई कास्टिंग को सबसे अहम मानते हैं। उन्होंने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि जब 'ताल' बनी थी, तब ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना इंडस्ट्री में नए थे, जिससे उनके किरदारों में एक भोलापन और ताजगी दिखी।
जब उनसे अहान पांडे और अनीत पड्डा जैसे उभरते सितारों को कास्ट करने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया:
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किरदार की मांग: भले ही ये कलाकार अब स्टार बन चुके हैं, लेकिन 'ताल 2' के लिए ऐसे चेहरों की जरूरत है जो पूरी तरह नए और असली लगें।
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सबक: घई ने स्वीकार किया कि उनके करियर में जो फिल्में असफल रहीं, उनकी मुख्य वजह गलत कास्टिंग ही थी। इसलिए 'ताल 2' के लिए वे बेहद संभलकर चुनाव करेंगे।
एक नजर 'ताल' (1999) पर
बता दें कि 1999 में आई 'ताल' में अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। ए.आर. रहमान के संगीत ने इस फिल्म को अमर बना दिया था। फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे, बल्कि भारतीय सिनेमा के संगीत को वैश्विक पहचान भी दिलाई थी।

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