बयानबाजी तेज: फडणवीस ने राहुल गांधी पर साधा जोरदार निशाना
हैदराबाद: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई 'किफायत बरतने' की अपील ने देश में एक नया राजनीतिक विवाद छेड़ दिया है। पीएम मोदी ने जनता से सोना, पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल और खाद के उपयोग में बचत करने के साथ-साथ विदेश यात्राओं से बचने का आग्रह किया था। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
राहुल गांधी का सरकार पर प्रहार: 'यह उपदेश नहीं, नाकामी है'
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की इस अपील को केंद्र सरकार की विफल नीतियों का परिणाम बताया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि जनता से त्याग करने की उम्मीद करना सरकार की कमजोरी दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि 12 साल के शासन के बाद देश ऐसी स्थिति में क्यों खड़ा है जहाँ नागरिकों को अपनी बुनियादी जरूरतों और यात्राओं पर पाबंदी लगानी पड़ रही है। राहुल गांधी के अनुसार, हर जिम्मेदारी जनता पर डालना एक 'कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम' की निशानी है।
देवेंद्र फडणवीस का पलटवार: 'राहुल गांधी रिजेक्टेड माल हैं'
राहुल गांधी के विरोध पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया से मुखातिब होते हुए फडणवीस ने राहुल गांधी को 'रिजेक्टेड माल' करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को देश के हर राज्य की जनता ने बार-बार नकारा है। फडणवीस ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जनता का समर्थन ही सबसे महत्वपूर्ण होता है और देश की जनता प्रधानमंत्री मोदी के फैसलों के साथ मजबूती से खड़ी है।
प्रधानमंत्री की अपील के पीछे के आर्थिक कारण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी स्पीच में अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक अनिश्चितता का हवाला दिया था। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए नागरिकों से व्यक्तिगत स्तर पर उपभोग कम करने और स्वदेशी विकल्पों पर जोर देने को कहा था। हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों को प्रबंधित करने में विफल रही है, जिसका बोझ अब आम आदमी पर डाला जा रहा है।
सियासी गलियारों में बढ़ी तल्खी
इस विवाद के बाद भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहाँ भाजपा नेता इसे राष्ट्रहित में उठाया गया कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे आर्थिक कुप्रबंधन का प्रमाण मान रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमाने की उम्मीद है, खासकर उन राज्यों में जहाँ विधानसभा चुनाव करीब हैं, क्योंकि इसका सीधा संबंध आम जनता की जेब और उनकी जीवनशैली से जुड़ा है।

पहले ही दिन एक्शन मोड में शुभेंदु अधिकारी, BSF और आयुष्मान भारत पर बड़े फैसले
आखिरी गेंद पर टूटा Mumbai Indians का सपना, RCB ने छीनी जीत
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल बढ़ी, राजस्थान में नए चेहरों को मिल सकता है मौका
दो माह में पांचवीं मौत से दहला NIT परिसर, मेस कर्मचारी ने दी जान