₹1 करोड़ का हर्जाना, DGP को नोटिस: महिला का आरोप- पुलिस ने की बदतमीजी, वीडियो भी बनाया
बिहार के भागलपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां की रहने वाली एक महिला ने शहर के एक थाना व ट्रैफिक पुलिस पर बदतमीजी और अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया है. महिला ने बिना इजाजत वीडियो बनाने का भी आरोप लगाते हुए डीजीपी से एक करोड़ रुपए हर्जाने की मांग की है. महिला ने कहा कि गाड़ी पार्किंग को लेकर हुई बहस में पुलिस ने मेरी गाड़ी का फोटो खींचा. मैं गाड़ी के अंदर ही बैठी थी, यहां तक की पुलिस वालों ने मेरे पति को यह भी कहा कि अगर महिला साथ ना होती तब आपको बताते. एक घंटे तक उन लोगों ने हमें एक जगह खड़ा रखा. महिला ने डीजीपी को नोटिस भेजते हुए सवाल किया है कि क्या एक महिला नागरिक के साथ बदतमीजी शोभा देती है?
दरअसल शहर के खलीफाबाग के व्यवसायी प्रतीक झुनझुनवाला अपनी पत्नी के साथ गाड़ी से तिलका मांझी थाना क्षेत्र स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समीप एक फार्मेसी पर पहुंचे थे, जहां अपनी पत्नी श्रेया को गाड़ी में छोड़कर वह दवाई लाने गए थे. इसी दौरान यह घटना घटी.महिला ने एसएसपी से मामले की शिकायत की है. पीड़िता ने बताया कि तिलका मांझी थाना पुलिस और तिलकामांझी यातायात पुलिस ने मेरे साथ बदतमीजी और अमानवीय व्यवहार किया है.
क्या था मामला?
महिला ने बताया कि मेरी गाड़ी फार्मेसी के बाहर खड़ी थी. उसी दौरान ट्रैफिक पुलिस बिना मुझसे पूछे मेरी गाड़ी का फोटो खींचने लगी. कुछ देर में मेरे पति वहां पहुंचे और उन्होंने आपत्ति जताई तो पुलिसकर्मी उन्हें धमकाने लगे. पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने का आरोप लगाकर 5 हजार का चालान काटने की बात कही. अपनी गलती को छुपाने के लिए उसने तिलका मांझी थाना गश्ती पुलिस और सिपाहियों को भी बुला लिया. वहां पहुंचे अन्य पुलिस कर्मियों में से एक ने कहा कि थाने चलिए तब बताते हैं. एक ने मेरे पति से कहा कि अगर मैडम साथ नहीं होती तब आपको बताते. वहीं मेरे परिचित को भी पुलिस ने डराया और धमकाया.
महिला ने मांगा एक करोड़ रुपए का हर्जाना
पीड़िता ने मामले में डीजीपी से एक करोड़ रुपये हर्जाना की मांग की है. उसने भागलपुर जिला पुलिस और ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बिना इजाजत वीडियो बनाने अमानवीय व्यवहार और अवैध तरीके से हिरासत में रखने की शिकायत की है. उसने धारा 80 के तहत डीजीपी को कानूनी नोटिस भेज कर कहा कि घटना की शिकायत उसने वरीय पुलिस अधीक्षक से की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. महिला ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस और तिलकामांझी थाने की पुलिस ने बार-बार मजबूरी बताने के बाद भी जबरन हमें रोक लिया, बदतमीजी की और धमकी भी दी. महिला ने कहा कि हाल में ही उनका ऑपेरशन हुआ है, इसके बाबजूद मुझे परेशान किया गया.
महिला ने अपनी मेडिकल रिपोर्ट, बिल और डिस्चार्ज टिकट भी डीजीपी के साथ साझा की है. पीड़िता ने कहा कि पुलिस ने हालत की अनदेखी कर मुझे अपमानित किया. इसके लिए जिम्मेदार पुलिसवालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और नागरिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की.
कोर्ट जाने की कही बात
आगे महिला ने कहा है कि यदि दो महीने में डीजीपी से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह अदालत में सिविल मुकदमा करेंगी. महिला श्रेया कुमारी ने मानसिक उत्पीड़न, अपमान और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. यह नोटिस आइजी, एसएसपी, एसपी व डीएसपी को भी भेजी गई है. महिला ने कहा कि जब तक पुलिस वालों की अहंकार की संतुष्टि नहीं हो गई. उन लोगों ने मुझे जबरन रोक कर रखा. इस दौरान मेरी गाड़ी का चालान भी नहीं काटा.

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