Marathi Language Row: कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई की दो टूक प्रतिक्रिया
हुसैन दलवाई के तीखे तेवर: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, मराठी भाषा और नमाज मामले पर भी दी प्रतिक्रिया
मुंबई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने हालिया घटनाक्रमों पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में अधिकारियों की नियुक्ति और महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी की अनिवार्यता पर सरकार को घेरा है।
पश्चिम बंगाल चुनाव: 'गड़बड़ी की आशंका और आयोग पर सवाल'
हुसैन दलवाई ने बंगाल चुनाव में केंद्रीय अधिकारियों की भूमिका पर चिंता जताते हुए इसे असामान्य बताया:
-
अधिकारियों की नियुक्ति: उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार राज्य के अधिकारी ही चुनाव निगरानी करते रहे हैं। केंद्रीय अधिकारियों का वर्चस्व बढ़ाना 'घपलेबाजी' की ओर इशारा करता है।
-
पुनर्मतदान (Re-polling) का समर्थन: दक्षिण 24 परगना के 15 बूथों पर दोबारा मतदान कराए जाने को उन्होंने सही ठहराया। दलवाई ने सीधा आरोप लगाया कि बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाएं केंद्र के प्रभाव में हो रही हैं।
-
स्ट्रांग रूम की निगरानी: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा स्ट्रांग रूम की खुद निगरानी किए जाने के फैसले को उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह का परिणाम बताया।
महाराष्ट्र: 'मराठी भाषा और लाइसेंस विवाद'
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने और परिवहन मंत्री के 'लाइसेंस कैंसिलेशन' वाले बयान पर दलवाई ने तंज कसा:
-
प्रशासनिक चूक: उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मराठी अनिवार्य है, तो लाइसेंस देते वक्त इसकी जांच क्यों नहीं की गई?
-
व्यावहारिक ज्ञान: दलवाई ने कहा कि ड्राइवरों को इतनी मराठी जरूर आनी चाहिए कि वे स्थानीय यात्रियों को उनकी भाषा में जवाब दे सकें, लेकिन पढ़ने-लिखने की कड़ी अनिवार्यता पर उन्होंने सवाल खड़े किए।
-
दोहरा मापदंड: उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि एक तरफ मराठी स्कूल बंद हो रहे हैं और मराठी परिवारों में अंग्रेजी का चलन बढ़ रहा है, लेकिन सरकार का ध्यान केवल ड्राइवरों पर है।
सार्वजनिक जगहों पर नमाज: 'हाईकोर्ट का फैसला सही'
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाली याचिका खारिज किए जाने पर हुसैन दलवाई ने अदालत का समर्थन किया:
-
अनुशासन जरूरी: उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों को हर वक्त धार्मिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है।
-
सहमति: दलवाई ने अपने बयान में इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्णय को न्यायसंगत ठहराया है।
चुनावी निगरानी और TMC की याचिका
चुनाव आयोग द्वारा राज्य कर्मचारियों को मतगणना की निगरानी से बाहर रखने के फैसले का TMC ने सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया है। इस पर दलवाई ने समर्थन जताते हुए कहा कि राज्य के अधिकारियों को प्रक्रिया से बाहर रखना लोकतंत्र की स्थापित परंपराओं के विरुद्ध है और इससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

कपिल सिब्बल का बयान: मतगणना केंद्रों पर राज्य सरकार के कर्मचारी जरूरी
ठाणे में क्रेन हादसा: लिंक रोड साइट पर गिरने से दो मजदूरों की मौत
Mamata Banerjee का दावा: बंगाल में फिर बनेगी TMC सरकार
ईरान-यूएस तनाव के बीच फंसा सुपरटैंकर, रणनीतिक हलचल तेज