बिहार में धर्म के नाम पर भीड़ हिंसा: मोहम्मद अतहर हुसैन की दर्दनाक मौत
इस बदलते दौर में लोगों के रहन सहन का तरीका लगातार बदल रहा है. ऐसे में इस कलयुगी दुनिया में जहां एक ओर अच्छे लोग है वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे भी है जिन्होंने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी है. ऐसा ही एक मामल बिहार के नवादा जिले से सामने आया है, जिसने लोगों के दिलों को दहला कर रख दिया है. दरअसल 5 दिसंबर को भीड़ की हिंसा में बुरी तरह घायल हुए मोहम्मद अतहर हुसैन (40) की शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई. मौत से दो दिन पहले, 7 दिसंबर को पीड़ित ने कैमरे पर अपना बयान दर्ज कराया था, जिसमें उसने अपने साथ हुई अमानवीय यातना का खुलासा किया.
धर्म पूछकर शुरू हुआ हमला
पीड़ित के अनुसार, 4 से 5 लोगों ने उसे घेर लिया और एक कमरे में ले जाकर उसकी पैंट उतारकर धर्म की पहचान की. इसके बाद उस पर बेरहमी से हमला किया गया. आरोप है कि हमलावरों ने गर्म रॉड और लोहे की छड़ से वार किया, सिर फोड़ दिया और उंगलियां तोड़ दीं. लाठी, डंडे और ईंटों से उसे लगातार पीटा गया.
गला दबाया, कान काटे, अधमरा छोड़ा
अपने बयान में अतहर हुसैन ने बताया कि हमलावर उसके सीने पर चढ़कर गला दबाने लगे. प्लायर से उसके कान काटे गए और इतनी मारपीट की गई कि वह बेहोश हो गया. इसी दौरान किसी ने डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उसे अस्पताल ले जाया गया.
छह दिन बाद टूटी सांसें
इलाज के दौरान छह दिन तक जिंदगी से जूझने के बाद अतहर हुसैन की मौत हो गई. वह मूल रूप से नालंदा जिले के लहेरी थाना क्षेत्र का रहने वाला था और नवादा के रोह थाना क्षेत्र के बरुई गांव में ससुराल में रहकर कपड़े बेचने का काम करता था.
पत्नी ने दर्ज कराई एफआईआर
मृतक की पत्नी शबनम परवीन ने 10 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. पुलिस के अनुसार अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश जारी है. पोस्टमॉर्टम मजिस्ट्रेट और फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी में कराया गया है. यह घटना भीड़ की हिंसा और नफरत की भयावह सच्चाई को उजागर करती है, जिसमें एक व्यक्ति को धर्म के नाम पर जान से मार दिया गया.

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