वास्तु का प्रचलन सदियों, युगों पहले से है। पुराणों के अुसार भगवान विश्वकर्मा जी ने भी अलग-अलग युग में सोने की लंका, इंद्रप्रस्थ और द्वारिका का भी भव्य निर्माण वास्तु से ही किया था। वर्तमान समय में लोगों के पास अच्छा भला मकान होने के बाद भी घर में सुख, शांति, औलाद और पैसे की कमी होती है वास्तुशास्त्र के अनुसार इन सभी अभावों के लिए घर का वास्तु भी जिम्मेदार हो सकता है। घर में कौन सा कमरा किस हिसाब से बना है। शयनकक्ष, रसोईकक्ष और मंदिर आदि का वास्तु के हिसाब से सही विधिवत होना आवश्यक है।
घर में कभी दक्षिण दिशा के मुख्य द्वार वाला भवन नहीं लेना चाहिए और यदि लें भी तो भवन के बाहर मुख्य द्वार के ऊपर पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा स्थापित करें। इससे भवन का दोष समाप्त हो जाएगा। विपत्तियों से छुटकारा मिलेगा। पश्चिम, पूर्व और उत्तर दिशा मुख वाले भवन को प्राथमिकता दें।
ध्यान रखें कि भवन के सामने कोई भारी वृक्ष नहीं होना चाहिए अन्यथा घर के मुखिया की युवावस्था में अकस्मात मृत्यु होने की आशंका रहती है। पीपल और बरगद के वृक्ष कष्ट नहीं देते लेकिन घर के सामने बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, इसे वास्तु वेध कहते हैं। घर के पास किसी वृक्ष की छाया अगर भवन पर पड़े तो उस पेड़ को प्रतिदिन जल से सींचना चाहिए।
घर में कभी अनार का पेड़ नहीं लगाना चाहिए और न ही कांटे वाले पौधे लगाने चाहिए वरना आपके दुश्मनों की संख्या बिना किसी वजह के बढ़ सकती है। घर के ब्रह्म स्थान पर सदैव तुलसी का पौधा लगाएं और नित्य उसकी पूजा करें और जोत जलाएं।
घर के बाहर और ऊपर बड़े पत्ते वाले पौधे रखें, खुशहाली आएगी।
घर में कभी अनार का पेड़ नहीं लगाना चाहिए और न ही कांटे वाले पौधे लगाने चाहिए वरना आपके दुश्मनों की संख्या बिना किसी वजह के बढ़ सकती है। घर के ब्रह्म स्थान पर सदैव तुलसी का पौधा लगाएं और नित्य उसकी पूजा करें और जोत जलाएं।