भोपाल। शुक्रवार की सुबह शुरू हुई रूहानी महफिल में शिरकत करने के लिए पहुंचने वालों का सिलसिला गुरूवार रात से ही शुरू हो गया था। भोपाल रेलवे स्टेशन, विभिन्न बस स्टेंडों और शहर के कई स्थानों से जमातियों को वाहन द्वारा इज्तिमागाह पहुंचाने के लिए मुफ्त इंतजाम किए गए हैं। जमातियों की खिदमत के लिए शहर मेजबान बनकर खड़ा दिखाई दे रहा है और जमातियों को अल्लाह का मेहमान मानकर उनके लिए बेहतर से बेहतर करने की कोशिश करता नजर आ रहा है। लाखों जमातियों के इज्तिमागाह पहुंचने के अलावा फिलहाल जमातों की आमद का सिलसिला जारी है। 
72वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आगाज शुक्रवार सुबह मुकामी उलेमा अली कदर साहब के बयान के साथ हो गया है। सुबह फजिर की नमाज के बाद शुरू हुए तकरीर-ओ-बयान के दौर में शामिल होने के लिए जमातों का पहुंचने का सिलसिला गुरूवार रात से शुरू हो गया था। देशभर की सैकड़ों जमातों के साथ श्रीलंका, मलेशिया, इन्डोनेशिया, जार्डन, अमेरिका, यूके, अफगानिस्तान, रूस, कंबोडिया, इंग्लैंड, तिरिकिस्तान, वियतनाम सहित कई मुल्कों की जमाते इज्तिमा में शिरकत कर रही हैं। जहाँ जमातों के ठहरने के इन्तजाम करीब 70 एकड़ में लगे पांडाल में किए गए हैं। वहीं विदेशी जमातों को मस्जिद हफीज में ठहराया गया है।
स्पेशल ट्रेनों से आ रहीं जमातें
शुक्रवार को कई स्पेशल ट्रेनें जमातियों को लेकर भोपाल पहुंचीं। इनमें करनौल और गुंटूर की ट्रेनों के अलावा कुछ और ट्रेनें शामिल हैं। इसके अलावा एक ट्रेन शुक्रवार शाम को शोलापुर से चलकर शनिवार सुबह भोपाल पहुंचेगी। जमातियों के लिए स्पेशल इस टे्रेन में भी बड़ी तादाद मेंं महाराष्ट्र के जमाती आएंगे। इधर रेलवे ने इज्तिमा के आखिरी दिन दुआ-ए-खास के बाद एक स्पेशल ट्रेन दिल्ली के लिए चलाने का ऐलान किया है। यह ट्रेन अनारक्षित टिकट पर दिल्ली रूट के विभिन्न शहरों के यात्रियों को लेकर रुख्सत होगी।
बाहरी जमातों ने दी पहले ताजुल में दस्तक
बरसों से भोपाल इज्तिमा में शिरकत करने आ रहे प्रदेश और प्रदेश से बाहर के जमातियों का मामूल अब भी पहली दस्तक ताजुल मसाजिद में देने का बना हुआ है। यही वजह है कि शुक्रवार को इज्तिमागाह पर होने वाली जुमा की नमाज में शरीक होने की बजाए बड़ी तादाद में लोगों ने ताजुल मसाजिद में जुमा अदा किया और उसके बाद वे इज्तिमागाह की तरफ रवाना हुए। इधर बड़ी तादाद में मुकामी लोगों ने भी ताजुल मसाजिद में ही नमाज-ए-जुमा अदा की, जिसके चलते यहां आम दिनों के जुमा की बजाए इस शुक्रवार बेहद भीड़ नजर आई। 
पहले दिन सादगी से हुए सैकड़ों निकाह
शुक्रवार शाम को असिर की नमाज के बाद बयान वाले पांडाल से हटकर बनाए गए खास खेमे में सैकड़ों निकाह हुए। दिल्ली मरकज से आए मौलाना साअद साहब ने इन निकाहों की तकमील कर खुतबा सुनाया और इन सभी जोड़ों की कामयाब जिंदगी की दुआ की। महंगी शदियों और दहेज के कलंक को मिटाने की मंशा के साथ होने वाले इज्तिमाई निकाह के दौरान महज दूल्हा और उनके परिजन मौजूद रहते हैं, जबकि दुल्हन की रजामंदी उसके परिजनों की मौजूदगी में पहले से ही घरों पर ले ली जाती है।  अब तक जारी व्यवस्था में इज्तिमा के दूसरे दिन निकाह पढ़ाए का रिवाज रहा है लेकिन पिछले साल से इस व्यवस्था को बदलकर इज्तिमा के पहले दिन कर दिया गया है। 
खिदमत के लिए लगे कैम्प
राजधानी में खिदमत के लिए जगह-जगह कैम्प लगाए गए हैं। भोपाल रेलवे स्टेशन, हबीबगंज रेलवे स्टेशन, नादरा बस स्टेंड, भोपाल टाकीज, प्रभात चौराहा से इज्तिमागाह पर जाने वालों के लिए खिदमती कैम्प लगाए गए हैं। स्टेशन पर उतरते ही पहले इज्तिमा यात्रियों का इस्तकबाल किया जाता है। इसके बाद उन्हें कैम्प में लाकर चाय पिलाई जाती है, फिर मुफ्त के ट्रकों, बसों ,जीपों और अन्य साधनों से उन्हें इज्तिमा स्थल तक पहुंचाया जाता है।
यातायात पुलिस के साथ वॉलिटियर भी जुटे
प्रशासन के हजारों लोग तो खिदमत में लगे हुए हैं ही, यातायात पुलिस के भी हजारों जवान और बड़ी तादाद में तब्लीगी जमाअत के में बॉलिटियर यातायात व्यवस्था को बनाने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। यातायात व्यवस्था का आलम यह है कि लाखों लोगों के इज्तिमा पहुंचने के बाद भी जरा सा भी कहीं न तो ट्राफिक जाम हो रहा है और न ही किसी सड़क किनारे रहने वालों को किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना करना पड़ रहा। वॉलिटियर्स का यह जज्बा देख पुलिस भी उनसे सबक ले रही है। लाखों लोगों के बाद भी किसी तरह की कोई अव्यवस्था नजर नहीं आ रही।
विदेशी जमाअतों के लिए अलग व्यवस्था
इज्तिमा पहुंचने वाली विदेशी जमाअतों के लिए अलग  इंतजाम किए गए हैं। जिससे की वह इज्तिमा में सुकून के साथ दीन की बातें सुन और समझ सकें। उनके लिए विभिन्न भाषाओं के ट्रांसलेटर इन कैम्पों में नियुक्त किए गए हैं, जो बयान को विदेशी मुल्कों की जुबान में ट्रांसलेट करके विदेशियों को समझाते हैं।
सर्वधर्म सद्भावना मंच ने किया जमातों का इस्तकबाल 
सर्वधर्म सद्भावना मंच ने शुक्रवार शाम को भोपाल टॉकीज चौराहे पर जमातों का स्वागत किया। संस्था के हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने बताया कि इस दौरान डॉ. फादर आनंद मुडुंगल, गुरुचरण सिंह अरोरा, टीआर गहलोत, ज्ञानी दिलीप सिंह, मोहम्मद कलीम एडवोकेट, पंडित नरेंद्र, हाफिज इस्माइल बैग, मुफ़्ती मोहम्मद राफे, मुजाहिद मोहम्मद खान आदि मौजूद थे। 
उलेमाओं ने कहा, अल्लाह की राह से भटकोगे तो होगे परेशान
शुक्रवार अल सुबह शुरू हुए बयान-ओ-तकरीर के दौर के बीच उलेमाओं ने इंसानियत, तालीम, आपसी भाईचारे और दूसरों के प्रति हमारे कर्तव्य को लेकर बयान किए। उलेमाओं ने कहा कि सच्ची राह अल्लाह की है, इससे भटकोगे तो दुनिया में भी परेशान होंगे और आखिरत में भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। शुक्रवार सुबह पहला बयान भोपाल के आलिम मौलाना अली कदर साहब ने कहा कि अल्लाह ने हमें इंसान बनाकर इस जमीन पर भेजा है, इसके लिए हमें रातदिन उसका शुक्र अदा करना चाहिए। दोपहर जौहर की नमाज के बाद हुए बयान में कहा गया कि दुनिया की हर शे सिर्फ अल्लाह तआला की बनाई हुई है। वही सब पर कादिर है, वही सबकी बेहतरी के फैसले करने वाले हैं। शाम को मगरिब की नमाज के बाद दिल्ली मरकज से आए मौलाना सआद साहब ने मजबे को सम्बोधित करते हुए कहा दीन से हट जाने के चलते आज इंसान बुराइयों में मुब्तिला हो गया है। झूठ, दगा, बेईमानी, फरेब के चक्कर में वह हराम और हलाल का फर्क भूल गया है। इसी की वजह से दुनिया में तबाहियां और बर्बादियों के हालात बन रहे हैं। अल्लाह की रस्सी को मजबूती से पकड़ लो तो दुनिया में भी कामयाब हो जाओगे और आखिरत में भी आसानियां हो जाएंगी।
झलकियां
-रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भोपाल टॉकीज चौराहे से जमातों को इज्तिमागाह तक पहुंचाने के लिए वाहनों का इंतजाम किया गया है।
-सारे रास्ते यातायात की व्यवस्था वालेंटियर्स ने संभाल रखी है।
-इज्तिमागाह पर अजान होते ही जमाती नमाज की तैयारी में जुट जाते हैं। नमाज शुरु होने पर यहाँ पूरी तरह सन्नाटा पसर जाता है। 
-इज्तिमागाह पर लगे चिकित्सा शिविरों में सबसे ज्यादा भीड़ यूनानी शिफाखाने के कैम्प पर दिखाई दे रही है। यहाँ सर्दी-जुकाम के लिए जुशान्दा पीने के लिए कतारें लग रही हैं।
-इज्तिमा में स्थानीय लोग भी बड़ी तादाद में पहुंच चुके हैं, जिसके चलते शहर के अधिकांश मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों और बाजारों में सन्नाटे के हालात दिखाई दे रहे हैं।
-जमातों में पहुंचने वालों में कई ऐसे बुजुर्ग हैं, जो बरसों से यहां आ रहे हैं तो कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंनें पहली बार इस समागम का रुख किया है। इज्तिमा में 30 साल से लगातार आ रहे हाजी इनायत हुसैन और मोहम्मद अफजल शेख खुश दिखाई दे रहे थे कि उनका मामूल बरकरार है। पहली बार आए अली जफर और तकी अहमद के लिए यह समागम कई जिज्ञासाओं भरा दिखाई दे रहा है।