कोटा लूट के इरादे से बुजुर्ग दम्पति की हत्या के करीब 5 साल पुराने मामले में कोर्ट ने आरोपी पति-पत्नी को सजा सुनाई है. कोर्ट ने आरोपी पति जगदीश को फाँसी की सजा व पत्नी शिमला को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है. आरोपी जगदीश बुजुर्ग दम्पति के यहा लम्बे समय से ड्राइवर का काम करता था. और बुजुर्ग दम्पति के काफी विश्वास पात्र था.

आर्थिक तंगी ने बनाया हत्यारा
मामले से जुड़े रहे विशिष्ट लोक अभियोजक रितेश मेवाड़ा ने बताया कि जवाहर नगर थाने में मृतक के चाचा चंद्रशेखर अग्रवाल ने 15 अप्रैल 2014 को दर्ज करवाई रिपोर्ट में बताया कि सुबह साढ़े दस बजे उसके बेटे का फोन आया कि आपके चचेरे भाई राजेंद्र अग्रवाल 60 व उनकी पत्नी गीता देवी की उनके घर के डायनिंग हॉल में लाशें पड़ी है. और सिर से खून निकल रहा है. अलमारियां खुली है पूरा सामान बिखरा हुआ है. घर से नगदी व जेवरात चोरी हो चुके हैं.

जिसका उनके बेटे बृजेश अग्रवाल के आने पर पता लगेगा. पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 302, 457, 460, 411,  394 , 397, 120b में दर्ज की. जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी जगदीश को गिरफ्तार किया था. जगदीश ने बताया था वह आर्थिक दृष्टि से काफी कमजोर हो गया था उसने अपनी जमीन भी गिरवी रख दी थी व बेटे नरेंद्र की शादी का बोझ भी सामने था जगह-जगह रुपए उधार मांगने के बाद भी जब कहीं से कोई उम्मीद नहीं लगी तो उसने मालिक को ही निशाना बनाने की योजना बनाई थी.

भरोसे का कत्ल कर लाखों का माल चुराया
अग्रवाल दंपत्ति को जगदीश पर इतना विश्वास था कि वह 2 माह पहले कहीं बाहर गए तो घर की चाबी उसी को देकर गए थे इसी अवधि में उसने पूरे घर की रेकी कर ली थी. एक दिन वह शराब के नशे में रात करीब साढ़े दस बजे दोबारा अग्रवाल के घर आया.उस वक्त राजेंद्र अग्रवाल कंप्यूटर पर काम कर रहे थे तथा उनकी पत्नी गीता डायनिंग हॉल में टीवी देख रही थी.

मौका देखकर उसने कुर्सी पर बैठी गीता देवी के सिर पर पीछे से वार किया. पत्नी के गिरने की आवाज सुनकर पति अग्रवाल दौड़कर आए. वह पत्नी को उठाने के लिए झुके तो जगदीश ने मुसल से सिर के पीछे पर घातक वार कर दिया. दोनों की हत्या के बाद उसने दरवाजा बंद कर लिया. सभी लाइटें बंद कर, लाखो का कीमती सामान व नगदी लेकर फरार हो गया. 

पत्नी ने किया सहयोग 
इसके बाद घर पहुंचकर जगदीश ने सारी बात अपनी पत्नी शिमला को बताई. दूसरे दिन जगदीश उसकी पत्नी अपने दोस्त की कार से रवाना होकर पहले से किराए पर लिए गए कमरे पर गए. जहां सारा सामान छिपा दिया इसके बाद अपने गांव के लिए रवाना हो गए. जघन्य हत्याकांड से शहर में आक्रोश व्याप्त हो गया था.

तत्कालीन आईजी गोविंद गुप्ता ने भी मौका मुआयना किया था उन्हीं के निर्देश पर तत्कालीन एएसपी सिटी राजन दुष्यंत की अगुवाई में इस जघन्य हत्याकांड को खोलने के लिए विशेष टीम गठित की गई थी. जांच में सबसे पहले मृतकों के करीबी व विश्वास पात्र लोगों को केंद्रित किया है इसमें सबसे पहला नाम चालक जगदीश का आया.

पूछताछ में उसके बयानों में कई विरोधाभास सामने आए. सख्ती की तो वह टूट गया और उसने जुर्म स्वीकार कर लिया. मामले को लेकर पुलिस की ओर से कोर्ट में चालान पेश किया गया.पत्नी की भूमिका होने पर भी पुलिस ने पत्नी को गिरफ्तार कर उसे भी सह आरोपी बनाया था. 

130 पेज का फैसला
लंबी सुनवाई के बाद एडीजे कोर्ट क्रम संख्या 1 ने दोनो आरोपियों को दोषी माना. न्यायाधीश राजीव कुमार बिजलानी की अदालत ने 28 गवाहों के बयानों के बाद 130 पेज का फैसला सुनाते हुए आरोपी जगदीश को फांसी व पत्नी शिमला को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है. इधर न्याय के इंतजार में बुजुर्ग दम्पति के पुत्र की डेढ़ साल पहले मौत हो चुकी.