बिलासपुर । प्याज का नाम सुनते ही लोगों के आंसू निकल रहे है और प्याज आम लोगों की पहुंच से दूर होते जा रहा है। 20 रूपए किलो बिकने वाली प्याज आज 50 रूपए किलों हो गया है। जनवरी तक 100-150 रूपए किलो हो जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बारिश के कारण महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में प्याज की खेती बर्बाद हो गई है और नई फसल जनवरी फरवरी के पहले नहीं आएगी। हालांकि अन्य हरी सब्जियों की कीमत सामान्य होने से लोगों को राहत है। प्याज के बढ़े कीमत के कारण बड़े व्यापारी इसका जमाखोरी करने से नहीं चूक रहे हैं क्योंकि कोल्ड स्टोरेज में भी प्याज का स्टाक, प्याज जल्दी ही खत्म होने की संभावना है।
करीब छ साल पहले प्याज की कीमत अचानक बढक़र 80-100 रूपए किलो हो गई थी। वही हाल आज भी है। बारिश के कारण महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की प्याज की खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई है,जिसका खामियाज भुगतना पड़ रहा है। थोक विक्रेताओं को भी अब भनक लग गई है कि प्याज की नई फसल जनवरी फरवरी के पहले नहीं आने वाली इसलिए जमाखोरी करने से नहीं चूक रहे है। प्याज की लोकल आवक भी अभी संभव नहीं है क्योंकि ज्यादातर किसान यहां पर धान की खेती किए हुए है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि कुछ दिनों में कोल्ड स्टोरेज का प्याज भी खत्म हो जाएगा। इसलिए जमाखोरी भी शुरू हो गई है और प्याज की कीमत कम होने की संभावना नहीं है। 
हरी सब्जियों से लोगों को राहत 
हरी सब्जियों की लोकल आवक के कारण लोगों को थोड़ी राहत जरूर है,लेकिन टमाटर की कीमत फिर से बढऩे की संभावना है। फिलहाल टमाटर 30 रूपए किलोग्राम है, लेकिन पत्थलगांव, भाठापारा से टमाटर की आवक लगातार कम हो रही है, इसलिए कीमत बढऩे की संभावना है। कुछ दिन पहले टमाटर भी 50 रूपए किलो के करीब पहुंच गया था। भिंडी, करेला, लौकी, बैगन व अन्य हरी सब्जियों की लोकल आवक सामान्य है, जिससे लोगों को काफी राहत है। किसानों का कहना है कि अभी खेत में धान की फसल है, जिसके कारण हरी सब्जियां आपेक्षा कृत कम आ रही हैं।