जबलपुर. मल्टीप्लेक्स (Multiplex) के जमाने में अगर कोई शहर वापस 70 एमएम सिंगल पर्दे (70 mm Cinema Screen) के दौर में लौट आए तो इसे इत्तेफाक न समझें. मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर (Jabalpur) में कुछ ऐसा ही होने जा रहा है. जिस शहर में किसी जमाने में 2 दर्जन से भी ज्यादा सिनेमाघर (Cinema Hall) हुआ करते थे, वहां आज किसी का भी नामो निशान नहीं बचा है. शहर का आखिरी सिनेमा-हॉल ज्योति मार्च 2017 के बाद बंद कर दिया गया. लेकिन जबलपुर में एक बार फिर सिनेमा-हॉल का वह पुराना दौर आने वाला है. 70 साल पहले 1950 में खुला शारदा टॉकीज (Sharda Talkies), जो बंद हो गया था, एक बार फिर शुरू किया गया है. यहां 70 एमएम सिंगल पर्दे पर अब आप नई फिल्में देख सकेंगे.

नए नवेले अंदाज में शुरू हुई टॉकीज

70 एमएम सिंगल पर्दे का दौर, कभी शहरों में मनोरंजन का एकमात्र जरिया हुआ करता था. फिल्म के एक-एक सीन पर दर्शकों का सीटी बजाना, या इमोशनल सीन पर भावुक हो जाना, ये तमाम बातें आज के दौर में सिर्फ यादें बनकर रह गई हैं. जबलपुर में यादों के उसी सुनहरे दौर में लोगों को फिर से ले जाने के लिए सिंगल-स्क्रीन सिनेमा-हॉल की शुरुआत की गई है. जबलपुर में बनी 70 साल पुरानी शारदा टॉकीज अब नए नवेले रूप में फिर तैयार है दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए. हॉल के संचालकों ने बताया कि यहां दर्शकों को बॉलीवुड की तमाम फिल्में देखने को मिलेंगी. कई सालों से जर्जर हो चुकी टॉकीज को अब नया स्वरूप और परिवेश दिया गया है. संचालकों ने कहा कि कहने को यहां सिंगल पर्दा ही है, लेकिन दर्शकों के लिए आधुनिक सुविधाएं भी हैं.
शो की टाइमिंग भी रहेगी पुरानी

शारदा टॉकीज के दोबारा शुरू होने की खबर से जबलपुर के सिने-प्रेमियों में उत्साह का माहौल है. सिनेमा-हॉल में भीड़ जुटने लगी है. कई लोग तो बच्चों को टॉकीज दिखाने ला रहे हैं और पुरानी यादें ताजा कर रहे हैं. शारदा टॉकीज़ के बाहर फिल्म के शो की टाइमिंग की सूचना देने को एक कर्मचारी भी तैनात किया गया है. संचालकों ने बताया कि हॉल में पुराने ढर्रे पर यानी 12 से 3, 3 से 6, 6 से 9 और 9 से 12 के शो चलेंगे. शारदा टॉकीज के संचालक ने कहा कि मल्टीप्लेक्स में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए फिल्म देखना आसान नहीं होता. इसलिए उनका मकसद है कि इस हॉल में सभी वर्गों के लोग फिल्में देखें. उन्होंने बताया कि हॉल में टिकट दरें भी सस्ती होंगी.