मुंबई । बीते कुछ दिनों से नोरा फतेही को फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी खासी पहचान मिल गई है। फिल्म 'रोर: टाइगर्स ऑफ द सुंदरबन' से एक्टिंग डेब्यू करने वाली नोरा ने साउथ की फिल्मों में भी कई गानों पर परफॉर्म किया है। हालांकि फिल्म 'सत्यमेव जयते' के सॉन्ग 'दिलबर' के हिट होने के बाद से उन्हें घर-घर में पहचाना जाने लगा है। हाल में वह फिल्म 'बाटला हाउस' के आइटम नंबर 'साकी-साकी' से चर्चा में हैं। लेकिन नोरा का अभी तक का यह सफर इतना आसान नहीं था। कनाडा से इंडिया आने वाली नोरा फतेही ने हाल में दिए अपने एक इंटरव्यू में अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए लोगों का उनके व्यवहार के बारे में बताया। नोरा ने बताया कि कास्टिंग एजेंट्स उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे और उनके मुंह के सामने उनका मजाक उड़ाते थे। नोरा ने कहा कि उन्होंने हिंदी सीखना शुरू कर दिया था, लेकिन वह मानसिक रूप से इतनी तैयार नहीं थीं। उन्होंने बताया  कि लोग उनके सामने ही उनका मजाक उड़ाते थे, जैसे कि वह कोई सर्कस हों। लोग उनकी खिंचाई करते थे और जब नोरा घर लौटती थीं, तो रास्ते में रोती हुई जाती थीं। नोरा ने बताया कि एक बार एक कास्टिंग एजेंट ने उनसे कहा कि, 'हमें तुम्हारी जरूरत नहीं और तुम अपने देश वापस लौट जाओ।' उन्होंने बताया कि इस बात को वह कभी नहीं भूल सकती हैं। नोरा कहती हैं कि अब इस बात पर उन्हें भले ही हंसी आती हो, लेकिन उन्हें अभी भी याद है कि ऑडिशंस के बाद वह कैसे रिक्शे में रोती हुई घर वापस जाती थीं।