मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने भारत भवन में भोपाल लिटरेचर एण्ड आर्ट फेस्टिवल 2020 का शुभारंभ करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश और विशेष रूप से भोपाल, साहित्य और कला का केन्द्र बिन्दु है। कला और साहित्य के उत्सव के लिए भोपाल से सबसे उपयुक्त स्थान है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान बौद्धिक क्षमताओं से होगी। मध्यप्रदेश की नई पहचान गढ़ना होगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विविधता भारत की पहचान है। इस दृष्टि से दुनिया का कोई देश भारत की बराबरी नहीं कर सकता। यह संस्कृतियों का संगम स्थल रहा है। भारत की सांस्कृतिक पहचान सहिष्णुता और भाई-चारे से निर्मित हुई है। इसकी रक्षा करना सभी बुद्धिजीवियों, कलाकारों और लेखकों की जिम्मेदारी है । इस पहचान पर हमला होने का मतलब भारत पर हमला होना है। उन्होंने कहा कि भोपाल साहित्य और कला उत्सव अगले सालों में और भी ज्यादा भव्यता के साथ आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि भारत भवन को स्पंदनशील बनाने में बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों का परस्पर सहयोग जरूरी है। 

पूर्व केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री और लेखक श्री जयराम रमेश ने मुख्यमंत्री की सक्रियता और बौद्धिक क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत भवन का पुराना वैभव फिर से स्थापित होगा। संस्कृति मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने कहा कि सरकार और समाज मिलकर भारत भवन और प्रदेश के कला जगत को नई ऊँचाईयाँ देंगे। यह परस्पर सहयोग के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि साहित्य एवं कला उत्सव का शुभारंभ अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी दिवस पर हो रहा है। डॉ. साधौ ने कहा कि भोपाल भारत भवन से श्रीमती इंदिरा गांधी की यादें जुड़ी हैं। 

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान में रेरा के अध्यक्ष श्री अंटोनी डिसा की कथाओं के संग्रह 'वन फॉर सोरो टू फॉर ज्वाय', पत्रकार श्री देशदीप सक्सेना द्वारा बाघों जीवन संकट पर लिखी किताब 'ब्रेथलैस' और श्री प्रमोद कपूर की गांधी जी के जीवन पर चित्रों की किताब 'गांधी एक सचित्र जीवनी' का विमोचन किया। 

मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध वन्यजीव फिल्मकार और छायाचित्रकार श्री राजेश और नरेश बेदी के चित्रों की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने अंग्रेजी में लेखन करने वाली महिला साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए स्थापित सुशीला देवी अवॉर्ड सुश्री सुभांगी स्वरूप को प्रदान किया। भोपाल लेटरेचर फेस्टिवल के डायरेक्टर श्री राघव चंद्रा ने अगले तीन दिन में होने वाली साहित्य एवं कला विषयों एवं गतिविधियों की जानकारी दी और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के मूर्धन्य लेखक शामिल हो रहे है। अगले तीन दिनों में विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। फेस्टिवल का शुभारंभ ख्याति नाम शास्त्रीय गायिका सुश्री कलापिनी कोमकली द्वारा प्रस्तुत मंगल गायन से हुआ। इस अवसर पर मैगसेसे पुरस्कार विजेता श्री राजेन्द्र सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे। फेस्टीवेल की सचिव सुश्री मीरा दास ने आभार व्यक्त किया। 

पुस्तकों का विमोचन

श्री अंटोनी डिसा ने अपने लघु कथा संग्रह के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी में बताया कि यह तीन भागों में विभाजित है। पहले भाग की विषय वस्तु नारी, दूसरे भाग का केन्द्र बिन्दु गोआ और तीसरे भाग का विषय वस्तु अंग्रेजी प्रसिद्ध छोटी कविताएं है। श्री देशदीप सक्सेना की किताब ब्रेथलैस बाघों के संकटग्रस्त जीवन पर पर पत्रकार और वन जीव प्रेमी के रूप में टिप्पणी करती है। यह किताब बाघों के जीवन के प्रति संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती है। श्री प्रमोद कपूर की किताब गांधी जी के निजी जीवनी की फोटोग्राफिक यात्रा है।