कुटीर एवं ग्रामोद्योग तथा नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री हर्ष यादव और पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने बुनकरों की आय बढ़ाने के लिये खादी वस्त्र उत्पादन में सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिये मंत्रालय में अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। प्रमुख सचिव कुटीर एवं ग्रामोद्योग श्री अनिरूद्ध मुखर्जी, प्रमुख सचिव वित्त श्री मनोज गोविल, प्रबंध संचालक राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड श्री मनोज खत्री ने विचार-विमर्श में भाग लिया।

पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150वीं जयंती वर्ष में गाँधी दर्शन के अनुरूप बुनकरों द्वारा सौर ऊर्जा से विकेन्द्रीकृत रूप से लूम संचालित किये जाने की आवश्यकता है। इससे बुनकरों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएँ बढ़ेंगी। चर्चा के दौरान सौर ऊर्जा के उपयोग से उत्पादित खादी वस्त्रों को बाजार उपलब्ध करवाने के लिये भण्डार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम-2015 में प्रावधान किये जाने पर सहमति व्यक्त की गयी।

मंत्री श्री यादव ने कहा कि बुनकरों को सौर ऊर्जा के उपयोग से वस्त्र उत्पादन का प्रशिक्षण देने के लिये क्लस्टर का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसी एक स्थान पर पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में इसकी शुरूआत की जाये।

इस मौके पर बताया गया कि प्रदेश में सोलर चरखा और सोलर लूम के उपयोग के लिये कत्तिन और बुनकरों को प्रोत्साहित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि खादी ग्रामोद्योग आयोग ने वस्त्र उत्पादन में सौर ऊर्जा का उपयोग करना शुरू कर दिया है। आयोग के दिशा-निर्देश के अनुसार सोलर चरखे के एक क्लस्टर के लिये 8 से 10 कि.मी. की परिधि में करीब 300 कत्तिन और बुनकर कम से कम 400 सोलर चरखे और 100 सोलर लूम का उपयोग करेंगे। सिलाई कार्य के लिये भी कामगारों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।