भारतीय टीम के तेज गेंदबाज इशांत शर्मा इशांत सौवों टेस्ट खेलने वाले भारतीय टीम के दूसरे तेज गेंदबाज बने हैं। इशांत ने इंग्लैंड के खिलाफ दिन-रात्रि टेस्ट में उतरने के साथ ही यह उपलब्धि अपने नाम की थी।  
इशांत के पहले बतौर तेज गेंदबाज भारत की ओर से केवल पूर्व कप्तान कपिल देव ने ही 100 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं।  कपिल ने 137 टेस्ट मैच खेले हैं। वहीं 2007 में टेस्ट करिअर शुरू होने वाले इशांत ने 99 टेस्ट में 302 विकेट लिए हैं। 11 बार पांच विकेट और एक बार 10 विकेट लेने का कारनामा किया है। उन्होंने टेस्ट में एक अर्धशतक के साथ 736 रन बनाये हैं। 
टीम इंडिया की ओर से 100 से अधिक खेलने वाले खिलाड़ियों की बात की जाए तो अब तक 10 खिलाड़ियों ने यह रिकार्ड बनाया है। सचिन तेंदुलकर ने सबसे ज्यादा 200 टेस्ट खेले हैं। इसके अलावा राहुल द्रविड़ (163), वीवीएस लक्ष्मण (134), अनिल कुंबले (132), कपिल देव (131), सुनील गावस्कर (125), दिलीप वेंगसरकर (116), सौरव गांगुली (113), हरभजन सिंह (103) और वीरेंद्र सहवाग (103) भी यह कमाल किया है। इशांत के पहले टीम इंडिया के पूर्व लेग स्पिनर अनिल कुंबले ने भी इसी मैदान पर अपना 100वां टेस्ट मैच खेला था। तब भारतीय टीम ने श्रीलंका को 259 रन से हराया था। 
धोनी के अंतिम टेस्ट में इशांत को छोड़ना पड़ा था मैदान 
इशांत ने कहा है कि पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के अंतिम टेस्ट में जब उन्हें बीच में ही मैच छोड़ना पड़ा तो धोनी ने कहा था लंबू तुमने मुझे अंतिम टेस्ट में अकेला छोड़ दिया। इससे पहले स्पिनर आर अश्विन ने इशांत से कहा था कि आप पूर्व कप्तान धोनी को बेहतरीन कप्तान मानते हैं। आपके करियर में उनका योगदान भी रहा है। आप उनके टेस्ट मैच से संन्यास के गवाह रहे हैं। इसलिए उनके बारे में कुछ बताइये
इस पर इशांत कहा , ‘हां यह सही है कि मैं उस मैच में खेला था, जो माही भाई का आखिरी टेस्ट था। उस मैच के दौरान मेरे घुटनों में बहुत दर्द था और मैं हर सेशन में इंजेक्शन ले रहा था। हम यह भी नहीं जानते थे कि यह धोनी भाई का आखिरी टेस्ट मैच है। शायद वह मैच का चौथा दिन था और ऑस्ट्रेलिया अपनी पारी घोषित करने वाला था। तब मैं माही भाई के पास गया और बोला कि मैं अब और इंजेक्शन नहीं लगवाउंगा। धोनी ने कहा कि ठीक है अब तुम गेंदबाजी मत करो। बाद में कुछ हुआ तो उन्होंने मुझसे कहा कि लंबू तुमने मुझे मेरे आखिरी टेस्ट मैच में बीच में छोड़ दिया। इशांत ने कहा कि धोनी की यह बात मुझे आज भी याद आती है। अश्विन ने कहा कि शायद ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोई भी यह नहीं जानता था कि यह धोनी का आखिरी मैच था।