तेहरान। एटमी संधि से हटने के बाद अमेरिका व पश्चिमी देशों से लगातार हो रहे विवाद और इराक में ड्रोन हमले के दौरान मारे गए कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी के बाद ईरान के मौजूदा चुनाव बेहद ही अहम हैं। साल 2016 के चार साल बाद ईरान में राजनीतिक और सुरक्षा उथल-पुथल के बीच शुक्रवार को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। इससे ठीक पहले ईरान में हजारों उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई देते हुए चुनाव निगरानी संस्था गार्जियन काउंसिल ने कहा है कि उन्हें कानून के अनुसार ही अयोग्य घोषित किया गया है। विरोधियों का कहना है कि ईरान में सुधारवादी और मध्यमार्गी नेताओं को चुनाव लडऩे से रोका गया है। ऐसे में जो विकल्प है वह सिर्फ रूढि़वादी और अति-रूढि़वादी में से किसी एक का चुनाव है। आलोचकों का मानना है कि ईरान के लोग उम्मीद छोड़ चुके हैं खासकर ईंधन की कीमतों को लेकर पिछले वर्ष हुए प्रदर्शनों के बाद जिस तरह की कार्रवाई हुई, उसे देखते हुए।