भोपाल/लखनऊ । अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर पूरे देश में सतर्कता बढ़ती जा रही है। फैसले के मद्देनजर जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश 30 नवंबर तक निरस्त कर दिए गए हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले में अतिरिक्त फोर्स मंगाई गई है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में अस्थाई जेल बनाने के लिए विद्यालयों को चिह्नित किया जा रहा है। फैसले के बाद अयोध्या से जुड़ी जिले की सीमाएं सील करने की भी तैयारी है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर सतर्कता बढ़ा दी है। अयोध्या के बार्डर का जिला होने के चलते यहां खास एहतियात बरता जा रहा है। अयोध्या विवाद के फैसले को लेकर पुलिस समेत अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों को 24 घंटे अपने-अपने क्षेत्र पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर शासन के निर्देश पर पुलिस-प्रशासन सतर्क हो गया है। जिले की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है।


देशभर में चर्चाओं का दौर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। हर ओर फैसले को लेकर ही बात हो रही है। वहीं धर्मगुरुओं और मुस्लिम संगठनों ने आपस में कई दौर की बातचीत की है। इस बीच देश के कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। 


20 नवंबर तक संघ के सभी कार्यक्रम स्थगित
अयोध्या में विवादित स्थल के संबंध में इसी महीने आने वाले कोर्ट के फैसले के मद्देनजर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने सभी कार्यक्रम 20 नवंबर तक स्थगित कर दिए हैं। साथ ही स्वयंसेवकों की एक टीम बनाने का फैसला लिया है, जो आज से 17 नवंबर तक जनता के सभी वर्गों के बीच जाएगी और उनसे शांति बनाए रखने की अपील करेगी। संघ का निर्देश है कि इस बीच शाखाएं बंद नहीं होंगी। वहां पर अनिवार्य रूप से स्वयंसेवकों को पहुंचकर ध्वज प्रणाम करना है। पिछले करीब 20 दिनों से संघ ने सभी बैठकों पर विराम लगा दिया है। वरिष्ठ पदाधिकारियों के जरिये पूरे प्रदेश में सिर्फ फैसले का इंतजार करने और फैसला आने पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं देने को कहा गया है। सोशल मीडिया पर भी फैसले के संबंध में किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया गया है। संघ प्रमुख की तरफ से सभी पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर पूरे मामले पर नजर रखने को कहा गया है। रोज सुबह सभी प्रांतों के संघ भवनों में पदाधिकारी माहौल पर चर्चा करेंगे।


मोदी ने दी मंत्रियों को नसीहत, बयानबाजी से बचें
अयोध्या पर उच्चतम न्यायालय का फैसला आने से पहले बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों से इस मुद्दे पर अनावश्यक बयान देने से बचने और देश में सौहार्द बनाए रखने को कहा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। मंत्रिपरिषद की एक बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला आने की उम्मीद है इसलिए देश में सौहार्द बनाए रखना हर किसी की जिम्मेदारी है। मोदी ने इस मुद्दे पर अनावश्यक बयानबाजी से बचने को कहा। गौरतलब है कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि उच्चतम न्यायालय अयोध्या मामले में इससे पहले अपना फैसला सुना सकता है। 

मुकदमा जीते तो उन्माद नहीं: विहिप
विश्व हिंदू परिषद के एक शीर्ष पदाधिकारी ने कहा कि अयोध्या विवाद के मुकदमे में उच्चतम न्यायालय के संभावित फैसले के मद्देनजर लोगों से हर स्थिति में संयम बरतने की अपील की जा रही है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा, अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले से पहले देश में अमन-चैन का माहौल है। 

कांग्रेस ने बुलाई सीडब्लूसी की बैठक
वहीं, अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्लूसी) की बैठक बुलाई है। यह बैठक दस नवंबर को होने की संभावना है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बैठक में अयोध्या मामले पर अदालत के फैसले को लेकर विचार किया जाएगा।