इस्लामाबाद,पाकिस्तान ने भारत के नागरिकता संशोधन विधेयक को 'पक्षपातपूर्ण' बताया और इसे नई दिल्ली का पड़ोसी देशों के मामलों में 'दखल' का 'दुर्भावनापूर्ण इरादा' बताया। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने फिर जहर उगलते हुए इस विधेयक को आरएसएस के 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम करार दिया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मध्य रात्रि के बाद एक बयान जारी किया। उसमें कहा गया है, 'हम इस विधेयक की निंदा करते हैं। यह भेदभावपूर्ण है और सभी संबद्ध अंतरराष्ट्रीय संधियों और मानदंडों का उल्लंघन करता है। यह पड़ोसी देशों में दखल का भारत का दुर्भावनापूर्ण प्रयास है।' इसमें कहा गया कि इस कानून का आधार झूठ है और यह धर्म या आस्था के आधार पर भेदभाव को हर रूप में खत्म करने संबंधी मानवाधिकारों की वैश्विक उद्घोषणा और अन्य अंतरराष्ट्रीय संधियों का पूर्ण रूप से उल्लंघन करता है।

इस वक्तव्य में कहा गया कि यह विधेयक क्षेत्र में कट्टरपंथी 'हिंदुत्व विचारधारा और प्रभावी वर्ग की महत्वकांक्षाओं' का मेल है और धर्म के आधार पर पड़ोसी देशों के आंतरिक मामलों में दखल का इरादा स्पष्ट होता है। पाकिस्तान इसे पूरी तरह से अस्वीकार करता है।' इसमें कहा गया, 'भारत का यह दावा भी झूठा है जिसमें वह खुद को उन अल्पसंख्यकों का घर बताता है जिन्हें पड़ोसी देशों में कथित तौर पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।'

अंतरराष्ट्रीय संधियों और द्विपक्षीय समझौते का हवाला
वक्तव्य के मुताबिक, 'लोकसभा में लाया गया विधेयक पाकिस्तान और भारत के बीच हुए दोनों देशों के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े समझौते समेत विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों का भी पूर्ण रूप से विरोधाभासी है।' विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार की ओर से लाया गया यह विधेयक 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा को वास्तविक रूप देने की दिशा में एक प्रमुख कदम है, जिस अवधारणा को कई दशकों से दक्षिणपंथी हिंदू नेताओं ने पाला-पोसा।

फिर छेड़ा कश्मीर का राग
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि कश्मीर में भारत की कार्रवाई से 80 लाख लोग प्रभावित हुए है और इससे सरकारी नीतियों का पता चलता है। वक्तव्य के मुताबिक विधेयक ने 'लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के दावों के खोखलेपन को उजागर किया है। इसके पीछे बहुसंख्यक अजेंडा है और इसने आरएसएस-बीजेपी की मुस्लिम विरोधी मानसिकता को विश्व के सामने ला दिया है।'


इमरान खान का ट्वीट
उधर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने आज ट्वीट किया, 'भारतीय लोकसभा के द्वारा नागरिकता विधेयक को पारित किए जाने की हम कड़ी निंदा करते हैं। यह बिल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और पाकिस्तान के साथ हुए द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन है। यह आरएसएस के 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा का एक हिस्सा है और फासिस्ट मोदी सरकार का प्रपंच उजागर करता है।'


इमरान के ट्वीट में द्विपक्षीय समझौते का जिक्र और हकीकत
इमरान ने अपने ट्वीट में भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौते का जिक्र किया है। दरअसल, यह समझौता 1950 में तत्कालीन प्रधानमंत्रियों जवाहर लाल नेहरू और लियाकत अली खान के बीच हुई थी। भारतीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पेश करते हुए लोकसभा में कहा था कि नेहरू-लियाकत समझौते का भारत ने तो गंभीरता से पालन किया, लेकिन पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार होते रहे। शाह ने कहा वहां बीते 72 सालों में अल्पसंख्यकों की आबादी में बड़ी गिरावट आई जबकि भारत में स्थिति उलट है।

लोकसभा में गहन चर्चा के बाद भारी बहुमत से पास हुआ विधेयक
गौरतलब है कि सोमवार देर रात लोकसभा ने 7 घंटे की गहन चर्चा के बाद 80 के मुकाबले 311 मतों से नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को मंजूरी दे दी जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए उन गैर-मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो। विधेयक के कानून बन जाने पर ऐसे शरणार्थियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए यह स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में किसी भी धर्म के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा था कि इस विधेयक से उन अल्पसंख्यकों को राहत मिलेगी जो पड़ोसी देशों में अत्याचार का शिकार हैं।