छोटे बच्चों में मौसम बदलते ही सर्दी, खांसी-जुकाम का होना आम बात है। सर्दियों का मौसम है ऐसे में बच्चों को अधिक देखभाल की जरुरत है क्योंकि हर साल बहुत सारे बच्चे कमजोर होने की वजह से सर्दी खांसी से पीड़ित हो जाते हैं। नवजात बच्चों को तो विशेष देखभाल की जरुरत रहती है। इसका कारण है कि इनकी त्वचा बहुत कोमल होती हैं इसलिए दूषित हवा, सतह या किसी संक्रमित व्यक्ति की समीपता के कारण वह जल्दी ही रोगाणुओं के संपर्क में आ जाते हैं। ऐसे में बच्चे और मां-दोनों के लिए परेशानी खड़ी हो जाती है। आम तौर पर डॉक्टर छह साल से कम आयु के बच्चे को सर्दी खांसी की दवाइयां न देने का परामर्श देते हैं क्योंकि इन दवाइयों के कई साइड इफेक्ट भी होते हैं। ऐसे में घरेलू उपचार बच्चों को सर्दी-खांसी में राहत पहुंचा सकते हैं इसके लिए जरुरी सामान भी रसोईघ्रर में ही उपलब्ध रहता है हालांकि अगर बच्चा 3 माह से छोटा है और बुखार से पीड़ित है तो अपने डाक्टर से जरूर परामर्श ले ले। 
बच्चों को सर्दी-खांसी हो तो करें ये उपाय 
स्पंज-स्नानः
छोटे बच्चे का बुखार कम करने और शरीर के तापमान को नॉर्मल करने के लिए उन्हें दिन में 2 से 3 बार ठंडे पानी से अथवा स्पंज-स्नान करवाएं। स्पंज को कमरे के तापमान के बराबर-तापमान वाले पानी में भिगोकर उसका अतिरिक्त पानी निचोड़ लें और फिर बच्चे के तापमान को कम करने के लिए उसके हाथ-पैर, कांख एवं उसके कमर से नीचे के हिस्से को पोंछे। आप बच्चे के माथे पर गीली पट्टियां भी रख सकते हैं। गीली पट्टियों को कुछ-एक मिनटों के अंतराल पर बदलते रहें। ध्यान रहें कि अत्यधिक ठंडे पानी का इस्तेमाल न करें। यह शरीर के आंतरिक तापमान को बढ़ा सकता है। 
नींबूः
एक कढ़ाई में 4 नींबू का रस उसके छिलके और एक चम्मच अदरक की फांके लें। इसमें पानी डालें ताकि सारा सामान पानी इसमें डूब जाए। इस मिश्रण को 10 मिनट तक काढ़े। फिर बाद में पानी को अलग कर लें। अब इस तरल पेय में उतनी ही मात्र में गर्म-पानी तथा स्वाद के लिए शहद मिलाएं। बच्चों को दिन में 3-4 बार पीने को दें। ध्यान दें कि एक-वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए चीनी के स्थान पर शहद मिलाएं। 
शहदः
एक साल या उससे छोटी उम्र का बच्चा अगर सर्दी जुकाम से पीड़ित है तो शहद उसका सुरक्षित उपचार है। एक चम्मच नींबू के रस में 2 चम्मच कच्चा शहद मिला लें। 2-3 घंटे बाद बच्चे को थोड़ा थोड़ा पिलाएं। एक गिलास गर्म-दूध, शहद मिलाकर पीने से सूखी खांसी एवं सीने के दर्द में राहत मिलती है।
चिकन का सूपः
एक वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए गर्म चिकन का सूप भी एक अच्छा विकल्प है। यह हल्का एवं पोषक होता है, तथा छाती जमने और नाक बंद होने से छुटकारा दिलाता है। इसमें उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट ठीक होने की प्रक्रिया को अधिक तेज कर देते हैं। आप दिन में दो से तीन बार यह बच्चों को सूप दे सकते हैं। 
संतराः
संतरे में मौजूद विटामिन-सी सफेद रक्त कोशिकाओं का निर्माण बढ़ाने में सहायक है। यही कोशिकाएं सर्दी-जुकाम के रोगाणुओं से लडती है। संतरा प्रतिरक्षा-तंत्र को दृढ़ता प्रदान करके खासी, गले की दर्द और नाक बहने की समस्या में राहत पहुंचाता है। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को प्रतिदिन 1 से 2 गिलास संतरे का रस पिलाएं। इससे कम आयु के बच्चों को बराबर मात्रा में पानी मिलाकर नियमित अंतराल के बाद पिलाएं। बड़े बच्चों को, विटामिन-सी की ख़ुराक अधिक करने के लिए, संतरे खाने को दिए जा सकते हैं।
अदरकः
6 कप पानी में आधा कप बारीक कटे हुए अदरक की फांके और दालचीनी के 2 छोटे टुकड़ों को 20 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। बाद में इसे छान लें और चीनी या शहद के साथ मिलाकर दिन में 3 से 4 बार बच्चे को पिलाएं। एक साल से कम आयु के बच्चों को बराबर मात्रा में गर्म-पानी मिलाकर पिलाएं।
सेब का सिरकाः
एक हिस्सा सेब का सिरका और 2 हिस्से ठंडा पानी मिलाकर उसमें 2 पट्टियां भिगोएं। फिर उन्हें निचोड़कर एक को माथे पर और दूसरा पेट पर रखें। 10-10 मिनट के बाद पट्टियां बदलते रहें। इस प्रक्रिया को बुखार कम होने तक दोहराएं ।
8 दूधः 
मां का दूध बच्चे के लिए अति महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे बीमार हों यह उन्हें अदभुत संतुलित पोषक-तत्वों की श्रृंखला प्रदान करता है जो उन्हें संक्रमण से लड़ने और शीघ्र स्वस्थ होने में सहायता करते हैं। 6 माह से कम आयु के शिशुओं को, सर्दी-खांसी से निजात दिलवाने के लिए, स्तनपान कराना चाहिए।
तरल पदार्थः 
आपके बच्चे को भरपूर तरल-पदार्थ मिलें नहीं तो वह पानी की कमी (निर्जलीकरण) का शिकार हो सकता है, जिससे समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। पानी आपके बच्चे के शरीर से कीटाणुओं का निकास करने के साथ ही उसे स्वस्थ बनाता है।