इन्दौर । बिजासन रोड़ स्थित अखंड धाम आश्रम पर चल रहे 52वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन में आज विभिन्न स्कूलों की 300 बालिकाओं को आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप एवं विभिन्न राज्यों से आए संतों की साक्षी में आत्मरक्षा के सूत्रों का प्रशिक्षण दिया गया। किसी धार्मिक आयोजन के मंच पर बालिकाओं को आत्मरक्षा के प्रशिक्षण का यह संभवतः पहला अवसर था। संतों ने भी इस आयोजन को समय की मांग बताते हुए आयोजकों से आग्रह किया कि वे इस तरह के प्रशिक्षण को निरंतर जारी रखें क्योंकि आज देश में महिला आत्म सम्मान को बढ़ाने तथा बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सख्त जरूरत है।
शहर के प्राचीन अखंड धाम आश्रम पर आज वैष्णव विद्यालय एवं शारदा कन्या विद्यालय की बालिकाओं को संस्था ज्वाला की प्रमुख डॉ. दिव्या गुप्ता ने लगभग एक घंटे तक आत्मरक्षा के सूत्र भी बताए और प्रशिक्षक के माध्यम से व्यवहारिक ज्ञान भी दिया। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को अपने साथ किसी अनहोनी को रोकने के लिए मानसिक और शारीरिक, दोनों स्तर पर तैयार रहने की जरूरत है। कई बार अकेले में अप्रिय हादसे होने की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए बालिकाओं को चौकन्ना रहने के साथ-साथ स्वयं मुकाबले के लिए भी तैयार रहना चाहिए। संस्था के प्रशिक्षक देवेंद्र ने इस अवसर पर आश्रम परिसर में बालिकाओं को दो समूहों में तैयार कर आत्मरक्षा के उपाय बताए। मंच पर मौजूद संतों ने भी इस पूरी प्रक्रिया को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। सारंगपुर की भागवताचार्य श्रीमती अर्चना दुबे ने कहा कि नारी शक्ति का ही दूसरा रूप है और वर्ष में दो बार हम नवरात्रि पर्व पर शक्ति की पूजा करते हैं। आज समाज में जो विकृति आ रही है, उसका मुकाबला खुद मातृ शक्ति को ही करना होगा। इसके लिए इस तरह के धार्मिक मंचों से भी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। चौबारा जागीर के संत नारायणानंद ने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में तभी आगे बढ़ सकती हैं जब समाज में उन्हें समुचित सम्मान और संरक्षण मिले। किसी धार्मिक आयोजन में इस तरह का प्रशिक्षण देने की यह शुरूआत अपने आप में अनूठी है। संस्था ज्वाला की प्रमुख डॉ. दिव्या गुप्ता ने कहा कि धर्म मातृ शक्ति के बूते पर ही फल फूल रहा है। यदि आज इस मंच से बालिकाओं को आत्मसुरक्षा के मामले में प्रशिक्षण की शुरूआत हुई है तो निश्चित ही हम एक संस्कारी, शालीन और सुरक्षित भारत का नवनिर्माण कर सकते हैं। आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप ने भी अगले वर्ष इस शिविर को और व्यापक रूप में आयोजित करने की घोषणा की। प्रारंभ में आयोजन समिति के देवकृष्ण सांखला, हरि अग्रवाल, दीपक जैन टीनू, विजयसिंह परिहार, मन्नूलाल गर्ग, मोहनलाल सोनी, रामकृष्ण गुलगांवा, प्रभु कछवाहा, स्वामी राजानंद, स्वामी दुर्गानंद आदि ने सभी संतों एवं डॉ. गुप्ता का स्वागत किया। मातृ शक्ति की ओर से सरस्वती पेंढारकर, अरूणा अग्रवाल, सुश्री किरण ओझा, राधा पुरोहित, पुष्पा यादव आदि ने सभी बालिकाओं की अगवानी की। वृंदावन से आए महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश्वरानंद ने भी बेटियों को शिक्षित एवं संरक्षित बनाने की जरूरत बताते हुए अखंड धाम संत सम्मेलन की आयोजन समिति को इस अनूठे कार्यक्रम के लिए साधुवाद प्रदान किए। अंत में महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप एवं अन्य संतों के सान्निध्य में डॉ. दिव्या गुप्ता को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच का संचालन हरि अग्रवाल एवं स्वामी नारायणानंद ने किया।
:: संत सम्मेलन :: 
बालिकाओं के शिविर के बाद संत सम्मेलन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई जिसमें मुंबई से आए महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती, वृंदावन से आए महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश्वरानंद, सारंगपुर की भागवताचार्य श्रीमती अर्चना दुबे, हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद आदि ने युगपुरूष स्वामी परमानंद गिरी की अध्यक्षता एवं जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ के आतिथ्य में वेद, वेदांत एवं अन्य धर्मग्रंथों के संदर्भ में प्रभावी विचार व्यक्त किए। सुश्री किरण ओझा ने गुरू वंदना प्रस्तुत की। आश्रम के संत दुर्गानंद एवं राजानंद ने स्वागत गीत के माध्यम से संतों की अगवानी की।
:: आज के कार्यक्रम, सफाई कर्मियों का सम्मान :: 
संयोजक देवकृष्ण सांखला एवं अध्यक्ष हरि अग्रवाल ने बताया कि संत सम्मेलन के तीसरे दिन युगपुरूष स्वामी परमानंद महाराज की अध्यक्षता मंे मुंबई के महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती, वृंदावन के महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश्वरानंद, वृंदावन के ही स्वामी प्रणवानंद सरस्वती, रतलाम के स्वामी देवस्वरूप सहित विभिन्न राज्यों से आए संतों के प्रवचन दोपहर 3 बजे से होंगे। अपरान्ह 4.30 बजे शहर को सफाई के मामले में सारे देश में नंबर वन बनाने की हैट्रिक दिलाने में भागीदार सफाई कर्मियों का सम्मान महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ के मुख्य आतिथ्य में होगा। संतों के प्रवचन 17 दिसंबर तक प्रतिदिन दोपहर 3 से सांय 7 बजे तक होंगे। इसके पूर्व दोपहर 1.30 बजे से सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम होंगे। सम्मेलन में देश के जाने-माने 200 से अधिक संत भागीदार बनेंगे।