संस्कृति मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ ने कहा कि वरिष्ठ लेखकों और संस्कृति कर्मियों का दायित्व है कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत एवं साहित्य के साथ ही मूल्यों की परम्परा से भी अवगत करायें। आज मूल्यों में गिरावट आ रही है और परिवार की परिभाषा सीमित हो गई है। बच्चों को एक कक्ष में ही पूरी दुनिया नजर आती है। नई पीढ़ी को जड़ों से परिचित करवाने में साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार के साथ ही समाज का भी दायित्व है कि वो आने वाली पीढ़ी को इस बारे में सीख प्रदान करें। डॉ. साधौ आज रवीन्द्र टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय साहित्य और कला महोत्सव 'विश्व रंग' को संबोधित कर रहीं थीं। चार दिवसीय महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर डॉ. साधौ और अन्य अतिथियों द्वारा 'कथादेश' का विमोचन किया गया।

मंत्री डॉ. साधौ ने कहा कि आज इतने यशस्वी लेखक देश-विदेश से भोपाल पधारे हैं। यह मध्यप्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है। भोपाल संस्‍कारों की भी राजधानी है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी ने सांस्कृतिक परम्परा की कड़ी को भारत भवन के शुभारंभ के साथ आगे बढ़ाया था। डॉ. साधौ ने कहा कि यहाँ पग-पग पर संस्कृति के रंग दिखाई देते हैं, साहित्य के दर्शन होते हैं। मध्यप्रदेश में आंचलिक संस्कृति के भी अनेक रंग हैं। यह देश का दिल है। दिल अच्छे से धड़कता है तभी शरीर स्वस्थ रहता है। मध्यप्रदेश में एक नवम्बर को प्रदेश के स्थापना दिवस से गोंड वर्ष मनाया जा रहा है। इससे मध्यप्रदेश की जनजातीय संस्कृति पूरे विश्व तक पहुँचेगी। संस्कृति मंत्री ने 'विश्व रंग' को अतीत से वर्तमान को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

इस अवसर पर संस्कृति मंत्री और अन्य अतिथियों ने वनमाली कथा सम्मान-2019 से प्रख्यात कथाकार प्रियंवद को सम्मानित किया। कार्यक्रम में 630 लेखकों की सहभागिता वाले कथा संग्रह 'कथोदश' का विमोचन किया गया। इसके साथ ही काव्य-संग्रह का लोकार्पण भी हुआ। प्रारंभ में टैगौर विश्वविद्यालय की ओर से श्री संतोष चौबे ने स्वागत उदबोधन दिया। कार्यक्रम में गुंदेचा बंधुओं ने ध्रुपद गायन प्रस्तुत किया। मंच पर वरिष्ठ साहित्यकार पदमश्री रमेशचंद्र शाह, चित्रा मुदगल, ममता कालिया, फिल्म निर्देशक रजत कपूर, शायर शीन काफ निजाम, सिद्धार्थ, लीलाधर मंडलोई, धनंजय वर्मा और देश-विदेश से पधारे सैकड़ों लेखक और कलाधर्मी उपस्थित थे।