नई दिल्ली देश में आर्थिक मंदी और कृषि संकट के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने शनिवार, 4 नवंबर को सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में कांग्रेस के प्रस्तावित 10 दिवसीय राष्ट्रव्यापी आंदोलन जिसमें आर्थिक मंदी, कृषि संकट, बेरोजगारी और प्रस्तावित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत होगी और आगे की प्लानिंग तय होगी।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने हाल ही में  बताया था कि पार्टी आर्थिक मंदी पर सरकार को घेरेगी, खासकर ग्रामीण इलाकों में। क्योंकि माना जा रहा है कि इस मुद्दे ने महाराष्ट्र और हरियाणा में हुए चुनाव में कुछ क्षेत्रों में प्रभाव डाला है। जिसका असर ये हुआ कि बीजेपी अपने दम पर बहुमत से दूर रह गई। हालांकि हरियाणा में बीजेपी दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी (JJP) की मदद से सरकार बनाने में सफल रही है। जबकि महाराष्ट्र में स्थिति अभी तक साफ नहीं हो पाई है।

विपक्षी पार्टियों को साथ लाने का कांग्रेस की यह कोशिश तब शुरू हुई है जब पीएम मोदी थाइलैंड के दौर पर पहुंचे हुए हैं। जहां वो क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और सदस्य देशों के नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने हाल ही कहा था कि कांग्रेस आरसीईपी के खिलाफ है और क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।

दरअसल आरसीईपी 16 देशों के बीच फ्री ट्रेफ का एक प्रयास है। लेकिन घरेलू उद्योग, किसान समूह, नागरिक संगठनों और विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियों का मानना है कि आरसीईपी की वजह से चीन भारत में सस्ता माल डंप करेगा। यहां तक की युवक कांग्रेस भी प्रस्तावित RCEP सौदे के खिलाफ सड़क पर उतरी थी और केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री गिरिराज सिंह के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया।