छठ का त्योहार इस बार 2 नवंबर को मनाया जाएगा। छठ 4 दिन का त्योहार होता है। छठ पर्व के तीसरे दिन जिसे संध्या अर्घ्य दिया जाता है, यह कार्तिक शुक्ल षष्ठी को पड़ता है। इसे संध्या अर्घ्य के नाम से ही जाना जाता है। इस बार यह पूरे दिन सभी लोग मिलकर पूजा की तैयारियां करते हैं। छठ पूजा में घाट का भी उतना ही महत्व है। व्रती घाट पर जाकर ही सू्र्यदेव को अर्घ्य देते हैं। पूजा के लिए घाट पर जाने से पहले कई तरह की तैयारियां भी की जाती हैं।


ध्यान रखने योग्य बातें

इस पूजा में गंगा स्थान या नदी या तालाब जैसी जगह होना अनिवार्य है यदि आप इनके पास नहीं जा सकते तो पूजा के लिए कृत्रिम तालाब भी बनाए जाते हैं। यही कारण है कि छठ पूजा के लिए सभी नदी तालाब की साफ-सफाई की जाती है और नदी तालाब को सजाया जाता है।

षष्ठी तिथि को सांयकाल में सूर्य देवता को गंगा-यमुना या फिर किसी पवित्र नदी या तालाब के किनारे सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।


अर्घ्य के दौरान नदी किनारे बांस की टोकरी में मौसमी फल, मिठाई और प्रसाद में ठेकुआ, गन्ना, केले, नारियल, खट्टे के तौर पर डाभ नींबू और चावल के लड्डू भी रखे जाते हैं।

छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद जैसे ठेकुआ, चावल के लड्डू जिसे कचवनिया भी कहा जाता है, बनता है। इसके अलावा बांस की बनी हुयी टोकरी जिसे दउरा कहते है में पूजा के प्रसाद, फल डालकर देवकारी में रख दिया जाता है।
पूजा के बाद शाम को एक सूप में नारियल,पांच प्रकार के फल और पूजा का अन्य सामान लेकर दउरा में रख कर घर का पुरुष अपने हाथो से उठाकर छठ घाट पर ले जाते हैं। यह अपवित्र न हो इसलिए इसे सर के ऊपर की तरफ रखते हैं। छठ घाट की तरफ जाते हुए रास्ते में महिलाएं छठ के लोकगीत गाते हुए जाती हैं

इसके बाद पीले रंग के कपड़े से सभी फलों को ढंक देते हैं और दीपक हाथ में लेकर टोकरी को पकड़कर 3 बार डुबकी लगाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस प्रसाद को बहुत ध्यान से रखा जाता है। इसमें साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष महत्व है।

इन चीजों का भी महत्व
छठ की पूजा में बांस की टोकरी का विशेष महत्‍व होता है। बांस को आध्‍यात्‍म की दृष्टि से शुद्ध माना जाता है। इसमें पूजा की सभी सामग्री को रखकर अर्घ्‍य देने के लिए पूजा स्‍थल तक लेकर जाते हैं। छठ में ठेकुए का प्रसाद सबसे महत्‍वपूर्ण माना जाता है। गुड़ और आटे से मिलाकर ठेकुआ बनता है। इसे छठ पर्व का प्रमुख प्रसाद माना जाता है। इसके बिना छठ की पूजा को भी अधूरी माना जाता है। छठ की पूजा में गन्‍ने का भी विशेष महत्‍व माना जाता है। अर्घ्‍य देते वक्‍त पूजा की सामग्री में गन्‍ने का होना सबसे जरूरी समझा जाता है। गन्‍ने को मीठे का शुद्ध स्रोत माना जाता है। गन्‍ना छ‍ठ मैय्या को बहुत प्रिय है। कुछ लोग गन्‍ने के खेत फलने-फूलने की भी मनौती मांगते हैं।