नियमित रूप से दांतों की सफाई से एक कैंसर जैसे बड़े खतरे से बचा जा सकता है।  दरअसल एक अध्ययन में पता चला है कि मसूढ़ों की बीमारी के बैक्टीरिया आहारनाल में कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। इस अध्ययन में मुंह में पाए जाने वाले माइक्रोबायोटा और आहारनाल कैंसर के खतरों के बीच संबंधों की जांच-परख की गई।
आहारनाल का कैंसर आठवां सबसे सामान्य तौर पर होने वाला कैंसर है और दुनियाभर में सबसे ज्यादा कैंसर से होने वाली मौत के मामले में इसका छठा स्थान है। दरअसल, रोग का पता तब तक नहीं चल पाता है, जब तक ये खतरनाक स्टेज में न पहुंच जाए। आहारनाल का कैंसर होने के बाद पांच साल जीने की दर है। प्रोफेसर का कहना है कि आहारनाल का कैंसर बहुत ही घातक कैंसर है। इसलिए इसकी रोकथाम, खतरों का स्तरीकरण और शुरुआत में पता चलने को लेकर नए मार्ग तलाशने की सख्त जरूरत है। आहारनाल में आमतौर पर जो कैंसर पाए जाते हैं, उनमें एसोफेजियल एडनोकारसिनोमा (ईएसी) और एसोफेजियल स्क्वेमस सेल कारसिनोमा (ईएसीसी) हैं। टैनेरिला फोर्सिथिया नामक बैक्टीरिया 21% ईएसी कैंसर के खतरे बढ़ाने में जिम्मेदार थे। वहीं, ईएससीसी के खतरों के लिए पोरफाइरोमोनस जिंजिवलिस बैक्टीरिया जिम्मेदार थे। ये दोनों प्रकार के बैक्टीरिया आमतौर पर मसूढ़ों की बीमारियों में पाए जाते हैं।