मोटापा कम करने के लिए की जानेवाली बेरियाट्रिक सर्जरी केवल बढ़े हुए फैट को घटाने का ही काम नहीं करती है। बल्कि जो लोग इस सर्जरी को कराते हैं, उन्हें स्किन कैंसर होने का रिस्क भी कम हो जाता है। इसमें मेलानोमा भी शामिल है। मेलानोमा उस स्थिति को कहा जाता है, जब स्किन को कलर देनेवाली सेल्स में कैंसर पनप जाता है। यह स्टडी हाल ही JAMA Dermatology में पब्लिश हुई है।

स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय से पीएच.डी. मैग्डेलेना टूब ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर स्किन कैंसर और मेलेनोमा पर बेरियाट्रिक सर्जरी के प्रभाव और मोटापे पर नियंत्रण को लेकर रिसर्च की। इस रिसर्च में इन बीमारियों से जुड़े कई अलग-अलग ऑस्पेक्ट्स को शामिल किया गया था। इस शोध में उन पेशंट्स को शामिल किया गया जिन्होंनेओबेसिटी को कम करने के लिए बेरियाट्रिक सर्जरी कराई थी। इन पेशंट्स की संख्या 2 हजार 40 थी।


शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च के दौरान पाया कि जो पेशेंट बेरियाट्रिक सर्जरी कराते हैं, उनमें स्वत: स्किन कैंसर और मेलानोमा होने का रिस्क कम हो जाता है और यह सर्जरी सीधे तौर पर इन स्किन कैंसर के होने की संभावनाओं को खत्म करती है। त्वचा कैंसर के जोखिम में कमी का आधार बॉडी मास इंडेक्स या वजन सर्जरी के बाद वजन का घट जाना नहीं था और ना ही इंसुलिन, ग्लूकोज, लिपिड और क्रिएटिनिन स्तर, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर, शराब का सेवन या धूम्रपान से इसका रिश्ता था।

शोध में साबित हुआ कि इन निष्कर्षों से पता चलता है कि बेरिएट्रिक सर्जरी के बाद मोटापे के साथ रोगियों में मेलेनोमा की घटनाओं में काफी कमी आ जाती है, जिस कारण स्किन कैंसर का रिस्क घटता है। हालांकि इस दिशा में अभी काफी काम किया जाना बाकी है। दुनियाभर में मोटापे की बीमारी जिस तरह बढ़ रही है, वह कई अन्य बीमारियों का कारण भी बन रही है।