लखनऊ । अयोध्या में राम जन्मभूमि मामले पर देश की के सर्वोच्च न्यायालय का फैसला कभी भी आ सकता है। इसके मद्देनजर  उत्तर प्रदेश और खास तौर पर अयोध्या में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि पुलिस करीब 1,659 लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ी तो इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड भी की जा सकती हैं। 
पुलिस प्रमुख ने कहा कि पुलिस फोर्स को साफ संदेश दिया गया है कि किसी भी कीमत पर शांति बरकरार रहनी चाहिए। हम पैदल गश्त कर रहे हैं। जिलाधिकारी धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर रहे हैं। हमने बीते कुछ दिनों में करीब 6000 शांतिवार्ताएं की हैं और 5800 धर्मगुरुओं से मिले हैं। हम सेना और वायुसेना के संपर्क में भी हैं। उन्होंने कहा कि हमारे रेडार पर अभी तक करीब 10 हजार लोग आए हैं और हमने उन्हें सीआरपीसी के तहत पाबंद किया है, जिससे वे शांतिभंग न कर सकें। इनमें से 450 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। फील्ड के बाद हमारा सबसे ज्यादा ध्यान सोशल मीडिया पर है और इसके लिए बाकायदा एक टीम को लगाया गया है। अभी तक ऐसे 1,659 लोगों के अकाउंट्स को हमने निगरानी में रखा है, जिनसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट की जा सकती हैं।
क्या जरूरत पड़ने पर प्रदेश में इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लग सकता है? इस सवाल पर डीजीपी ने बताया, 'अगर हमें जरूरत महसूस हुई तो बिल्कुल इंटरनेट सस्पेंड किया जा सकता है। मगर अभी ऐसी कोई जरूरत नहीं लगती।' उन्होंने आगे बताया, 'हमने अयोध्या समेत कुछ संवेदनशील जगहों की पहचान की है और उनकी बैरिकेडिंग कर आने-जाने वाले लोगों की तलाशी ली जा रही है।' डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि भीड़ नियंत्रण और अफवाहों को बढ़ने से रोकना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हमने केंद्र से अर्धसैनिक बलों की मांग की हैं और अभी तक 40 कंपनी अर्धसैनिक बल हमें मिल भी चुका है। 70 कंपनी बल और चाहिए होगा। ये कंपनियां पीएसी और पुलिस के अलावा तैनात रहेंगी। उन्होंने कहा कि हमारे सामने दोहरी चुनौती है क्योंकि अयोध्या में यह समय त्योहारों का है। इस वक्त वहां पंचकोसी परिक्रमा चल रही है। 10 नवंबर को ईद-ए-मिलाद है और 11-13 नवंबर तक कार्तिक पूर्णिमा मेला, जहां श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान करेंगे। हम पूरी तरह तैयार हैं और सभी आयोजन शांतिपूर्वक निपटेंगे।