नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की 4 से 6 फरवरी तक चली बैठक के बाद आज ब्याज दरों पर फैसला आएगा. साल 2020 में ये MPC की ये पहली बैठक (RBI Monetary Policy) है. अर्थशास्त्रियों का मानना हैं कि आरबीआई पिछली बार की तरह इस बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. ऐसे में आम आदमी की ईएमआई कम होने की उम्मीदों को झटका लग सकता हैं. फिलहाल आरबीआई को ग्रोथ में रिकवरी और महंगाई के कंफर्ट जोन में आने का इंतजार रहेगा.

आरबीआई का फैसला ऐसे समय आ रहा है, जब बजट पेश हो चुका है. वहीं, देश की जीडीपी ग्रोथ 6 साल के निचले स्तर पर है. साथ ही, महंगाई दर दिसंबर 2019 में बढ़कर 7.35 फीसदी हो गई हैं. RBI ने पिछली MPC बैठक के बाद रेपो रेट को 5.15 फीसदी पर स्थिर रखा था. रिवर्स रेपो रेट भी 4.90 फीसदी पर बरकरार है. रिजर्व बैंक ने CRR 4 फीसदी और SLR 18.5 फीसदी पर बनाए रखा है.

अप्रैल 2019 के बाद 5 बार RBI ब्याज दरें घटा चुका हैं-RBI ने इससे पहले लगातार 5 बार ब्याज दरों में कटौती की थी. इस दौरान रेपो रेट में 1.35 फीसदी की कमी आई. पिछली बार MPC के सभी 6 सदस्य ब्याज दरों में कटौती न करने के पक्ष में थे.

क्या होता है रेपो रेट- जिस रेट यानी ब्याज दरों पर आरबीआई कमर्शियल और अन्य बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. रेपो रेट कम होने का मतलब यह है कि बैंक से मिलने वाले लोन सस्ते हो जाएंगे. रेपो रेट कम हाने से होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह सभी सस्ते हो जाते हैं.

एमपीसी क्या है (What is MPC)- एमपीसी का गठन 2016 में हुआ था. इसके लिए वित्त विधेयक के जरिए आरबीआई एक्ट में संसोधन किया गया था. यह समिति आर्थिक विकास को देखते हुए नीतिगत दरें तय करती है. इसमें महंगाई की दर का खास ध्यान रखा जाता है. मौद्रिक नीति समिति में आरबीआई के गवर्नर सहित 6 विशेषज्ञ होते हैं. इसमें तीन सदस्य केंद्र सरकार और तीन आरबीआई के होते है. समिति की अध्यक्षता गवर्नर करते हैं.
समिति के हर सदस्य की सदस्यता चार वर्षों के लिए होती है. इस समिति के लिए वर्ष में कम से कम चार बैठकें करना जरूरी है.आरबीआई का मौद्रिक नीति विभाग मौद्रिक नीति तैयार करने में एमपीसी की मदद करता है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ आरबीआई अकेला ही मौद्रिक नीति समिति के जरिए अर्थव्यवस्था में बैंकिंग प्रणाली पर नजर रखता है.

दुनिया में ऐसे तमाम देश हैं जो किसी विशेष समिति के जरिए मौद्रिक नीति तैयार करते हैं. अगर आसान शब्दों में जानें तो अमेरीका में 'फेडरल ओपन मार्केट कमेटी' की मदद से यह काम फेडरल रिजर्व करता है. जापान और ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक भी मौद्रिक नीति समिति के जरिए ही मौद्रिक नीति बनाते हैं.