नई दिल्ली । राजधानी में कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दीवाली के बाद से अब तक देश में संक्रमण से हुई लगभग हर पांचवीं मौत दिल्ली में हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक देश में 15 से 21 नवंबर तक एक सप्ताह में कुल 3588 कोरोना पीड़ितों की मौत हुई है। वहीं दिल्ली में इस दौरान 751 कोरोना पीड़ितों ने दम तोड़ दिया। इस हिसाब से देखें तो पिछले एक सप्ताह में देश में हुई 21 फीसदी मौत अकेले दिल्ली में हुई हैं। दिल्ली में पिछले एक सप्ताह 15 नवंबर से 21 नवंबर तक में कुल 1.83 फीसदी कोरोना पीड़ितों ने दम तोड़ा है। इस सप्ताह दिल्ली में कोरोना संक्रमण के कुल 40,947 मामले सामने आए हैं और इनमें से 751 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में शुरू से लेकर अब तक कोरोना की मृत्यु दर 1.59 फीसदी है, जबकि पिछले एक सप्ताह में यह 1.83 फीसदी रही है। एम्स के निदेशक डॉक्टर गुलेरिया के मुताबिक कोरोना काल में प्रदूषण बढ़ने से तो न सिर्फ उसके फैलने बल्कि मरीजों में गंभीर लक्षण दिखने का खतरा भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। ऐसे में सामान्य लोगों को भी कोरोना संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है। एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय ने कहा कि इटली में हुए अध्ययन में यह देखा गया है कि प्रदूषण से प्रभावित उत्तरी इटली में दक्षिणी हिस्से के मुकाबले कोरोना से दोगुनी मौत हुई। इसी तरह प्रदूषण बढ़ने पर भारत में भी यही स्थिति बन सकती है। दिल और फेफड़े की बीमारियां बढ़ेंगी तब मौतें दोगुनी हो सकती हैं। एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर नवल विक्रम के मुताबिक प्रदूषण बढ़ने से और तापमान में कमी आने से सांस और दिल की बीमारियों के मरीजों के लक्षण बढ़ जाते हैं। इससे दिल के मरीजों को ह्रदयघात का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अगर कोरोना संक्रमण की भी दोहरी मार पड़ जाए तो मरीज गंभीर रूप से बीमार हो सकता है। वह इतना बीमार हो सकता है कि जान भी जा सकती है। इसी वजह से सर्दियां बढ़ने और प्रदूषण बढ़ने पर कोरोना से मौत की दर राजधानी में बढ़ रही है।