लोकसभा चुनाव में हरियाणा समेत देश के कई हिस्सों में करारी हार से परेशान कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व, खासकर गांधी परिवार के लिए एक और मुश्किल खड़ी हो गई है। एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट जल्द ही नेशनल हेरॉल्ड केस में पंचकूला स्थित संपत्ति को अपने कब्जे में ले सकते हैं। 2005 में तत्कालीन हरियाणा सरकार द्वारा पंचकूला में करोड़ों की संपत्ति को लाखों रुपए में एसोसिएटेड जर्नल्‍स लिमिटेड (एजेएल) को अलॉट कर दी गई थी। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्‌डा भी इसकी जांच के दायरे में हैं।

मामला पंचकूला में एजेएल को हिन्दी अखबार नवजीवन के प्रकाशन के लिए प्लॉट आवंटन से जुड़ा है। एजेएल पर कथित रूप से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का नियंत्रण है, जिनमें गांधी परिवार के सदस्य भी हैं। 1982 में तत्कालीन सीएम भजनलाल ने यह प्लॉट एजेएल को आवंटित कराया। 10 साल कंस्ट्रक्शन नहीं हुआ तो हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट ऑथोरिटी ने इसे वापस ले लिया।

2005 में अफसरों के मना करने के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री हुड्‌डा ने 1982 की कीमत पर ही प्लॉट एजेएल को ही फिर से अलॉट कर दिया। हुड्‌डा मुख्यमंत्री होने के साथ एचयूडीए के चेयरमैन भी थे। ईडी के अनुसार प्लॉट की कीमत 64.93 करोड़ रुपए थी, जबकि हुड्डा ने यह केवल 69.39 लाख रुपए में आवंटित कर दी थी। वहीं, आरोप यह भी है कि भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने 3360 वर्ग मीटर के इस बड़े भूखंड पर निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 1 मई 2008 से 10 मई 2012 के बीच 3 बार एजेएल के पक्ष में गलत तरीके से छूट दे दी।

एजेएल का निर्माण कार्य 2014 में जाकर पूरा हुआ। इस मामले की जांच सीबीआई के पास पहुंची। सीबीआई ने आरोप लगाया कि पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित प्लॉट नंबर सी-17 के फिर से आवंटन करने से राजस्व को खासा नुकसान हुआ। इस मामले में सतर्कता विभाग ने मई 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर केस दर्ज कर लिया। वहीं दिसंबर 2018 में पीएमएलए के तहत प्लॉट की कुर्की का आदेश जारी किया गया था। अब इस जमीन पर कब्जा लेने के लिए मंजूरी मिल गई है और जल्द ही डायरेक्टोरेट इस संपत्ति पर कब्जा ले सकता है।