नई दिल्ली/मुंबई: देश-दुनिया में गुरुवार शाम को करवाचौथ (Karwa chauth 2019) का त्योहार मनाया गया. सुहागन महिलाओं ने चांद का दीदार कर व्रत खोल चुकी हैं. इस मौके पर बॉलीवुड एक्ट्रेस ने भी अपने-अपने पतियों के लिए व्रत रखी थीं. कुछ एक्ट्रेस की तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें वे सजी-धजी दिख रही हैं. शिल्पा शेट्ठी, रवीना टंडन, पद्मिनी कोल्हापुरी की नीलम कोठारी की तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें वह सोलह श्रृंगार में दिख रही हैं. शिल्पा, रवीना और पद्मिनी सूर्ख लाल ड्रेस में दिख रही हैं. वहीं नीलम सुनहरे रंग की ड्रेस में पूजा करने के लिए जाती हुई दिखीं. दरअसल, इस बार सोनम कपूर के घर पर करवाचौथ (Karwa chauth 2019) पूजन का विशेष आयोजन किया गया था. यहां बॉलीवुड की कई एक्ट्रेस पूजा करने पहुंचीं.
 

दिल्ली-एनसीआर में करवाचौथ (Karwa chauth 2019) का अलग ही रंग देखने को मिलता है. यहां अपार्टमेंट कल्चर की वजह से सुहागन महिलाएं बालकनी से ही चांद का दीदार करके व्रत खोलती हैं. वहीं कुछ सोसाइटी में सामूहिक रूप से करवाचौथ (Karwa chauth 2019) पूजन का आयोजन किया गया.


उत्तर भारत सहित मुंबई में बड़े पैमाने पर करवाचौथ (Karwa chauth 2019) मनाया गया. खासकर पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंड़ीगढ़ में करवाचौथ (Karwa chauth 2019) का अपना ही रंग देखने को मिला. दरअसल, करवाचौथ (Karwa chauth 2019) पंजाब की शुरुआत पंजाब से ही हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह लगभग पूरे उत्तर प्रदेश में मनाया जाने लगा है. करवाचौथ (Karwa chauth 2019) पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. वह दिनभर निर्जला रहती हैं और शाम में पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती हैं.

करवा चौथ व्रत की कहानी
करवा चौथ की कहानी वीरवती नाम एक साहूकार की लड़की की कहानी है. इस साहूकार के सात लड़के और एक ही लड़की होती है. कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी करवा चौथ पर साहूकार की पत्‍नी के साथ उसकी सातों बहुएं और बेटी भी करवा चौथ का व्रत रखती हैं. सात भाइयों की एकलौती बहन वीरवती अपने भाइयों की बेहद लाड़ली होती है. रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन करने को कहा. इस पर बहन ने जवाब दिया- 'भाई, अभी चांद नहीं निकला है. चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं भोजन करूंगी.'


सातों भाई अपनी बहन का भूख से व्याकुल और मुरझाया चेहरा देख नहीं पा रहे थे. ऐसे में साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी. घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है. अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो. साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, सब अर्घ्य देकर भोजन कर लें. ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा, 'बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं.' वीरवती ने अपनी भाभियों की बात को अनसुना किया और भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन करने बैठ गई. लेकिन उसने जैसे ही पहला निवाला अपने मुंह में लिया, घर के एक नौकर ने आकर ये खबर दी कि उनके पति की मौत हो गई है. यह सुनते ही वीरवती फूट-फूट कर रोने लगी.

वीरवती की इसमें कोई गलती नहीं थी और इसलिए देवी उसके सामने प्रकट हो गईं. वीरवती ने माता को अपनी पूरी कहानी सुनाई. देवी ने उसे कहा कि वह एक बार फिर पूरे विधि-विधान और पूरी निष्‍ठा से करवा चौथ का व्रत करे. वीरवती ने ऐसा ही किया और अपने सुहाग के लिए उसका विश्‍वास और पूरी निष्‍ठा से किए व्रत के चलते यम देवता को भी विवश होकर वीरवती के पति को जीवित करना पड़ा.