इन्दौर । रविवार को दुनियाभर के स्कूलों में छुट्टी होती है, लेकिन इंदौर के एक स्कूल में बच्चों की भीड़ थी। यहां कक्षाओं में स्थानीय स्टूडेंट्स के साथ चीन, कनाडा, जर्मनी जैसे देशों से आए बच्चे भी थी। शिक्षा के क्षेत्र के प्रतिष्ठित 51वें राउंड स्क्वेयर इंटरनेशनल कांफ्रेंस में हिस्सा लेने इंदौर आए विदेशी स्टूडेंट्स ने रविवार को कम्युनिटी सर्विसेस के तहत कुछ स्कूलों के साथ वृद्धाश्रम, दृष्टिहीन संगठन और कैंसर फाउंडेशन आदि जगहों पर जाकर लोगों से मुलाकात की और कई गतिविधियों में शामिल हुए।
एमरल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल की मेजबानी में शहर में पहली बार आयोजित हो रही अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में विश्व के 55 देशों के दिग्गज स्कूल हिस्सा ले रहे हैं। एमरल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक श्री मुक्तेश सिंह और प्राचार्य श्री सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि राउंड स्क्वेयर कांफ्रेंस का उद्देश्य बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को समाजसेवा के प्रति प्रोत्साहित करना भी है। यहां कोशिश की जाती है कि विभिन्ना भाषा, देश और संस्कृति के बच्चे एक-दूसरे को जाने और विश्व बंधुत्व की भावना विकसित हो। इसी क्रम में रविवार को विदेशों से आए बच्चों ने बहुत सारी गतिविधियों में हिस्सा लिया। यह बच्चों के लिए किसी मस्ती की पाठशाला की तरह था।  
:: दोस्ती की जुबां ने मिटाई भाषा की दूरी :: 
नवलखा स्थित जीवनशाला हाई स्कूल की कक्षाएं आम दिनों की तरह रविवार को भी भरी थीं। यहां कुर्सी पर स्थानीय बच्चों के साथ विदेशी बच्चे भी थे। इस स्कूल में अधिकांश बच्चे कमजोर तबके के पढ़ते हैं, जो अंग्रेजी बहुत अच्छी नहीं बोल पाते। वहीं विदेशी बच्चों को हिंदी नहीं आती। इसके बावजूद इन्होंने मिलकर पेंटिंग में रंग भरे। यहां दोस्ती की जुबां के सहारे भाषा की दूरी मिट गई। कक्षाओं का माहौल ऐसा था मानो सभी एक-दूसरे को बहुत लंबे समय से जानते हैं। विदेशी बच्चे सेल्फी ले रहे थे। 
:: चीन, जर्मनी के स्टूडेंट्स ने खेला सितौलिया और रस्साकशी :: 
स्कूल में बहुत से खेल भी खिलाए गए, जिसमें चीन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी जैसे देशों के स्टूडेंट्स ने बहुत उत्साह से हिस्सा लिया। भारत में खेला जाने वाला सितौलिया जब खेलने की बारी आई तो विदेशी स्टूडेंट्स शुरू में तो कुछ झिझके, लेकिन इसके बाद ऐसे रमे मानो बचपन से खेलते हों। इनमें बड़ी संख्या लड़कियों की थी। यहां दो टीमें बनाई गई थीं और हर टीम में देसी व विदेशी दोनों स्टूडेंट्स शामिल थे। क्रिकेट और रस्साकशी में भी हाथ आजमाए गए। म्युजिकल चेयर के दौरान लगा कि बच्चे कहीं के भी हों, बच्चे एक से होते हैं। जीत के लिए सभी की शरारतें एक सी थीं। 
:: मोतीचूर के लड्डू बनाए, पेड की छाल से रस्सी बनाना सीखा :: 
एमरल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल के प्राचार्य श्री सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि राउंड स्क्वेयर इंटरनेशनल कांफ्रेंस में हिस्सा लेने आए विदेशी स्टूडेंट्स ने कम्युनिटी सर्विसेस के तहत रविवार को शहर के अनेक स्थलों पर सहयोग कार्य किए गए। सभी संस्थाओं में रहने वाले बच्चों को यूनिफॉर्म, टी-शर्ट वितरित की गई जबकि वृद्धाश्रम में चादर भेंट की गई। इस दौरान विभिन्न गतिविधियों के तहत बच्चों ने मोतीचूर के लड्डू बनाना और पेड़ की छाल से रस्सी बनाने की कला सीखी।
:: इन गतिविधियों में लिया भाग :: 
-गुमास्ता नगर स्थित बाइलैंग्वल एकेडमी में विदेशी स्टूडेंट्स ने साइन लैंग्वेज सीखने का प्रयास किया। यहीं इन्होंने भोजन भी किया। 
-अन्नापूर्णा रोड़ स्थित श्रीश्री उत्कर्ष समिति में स्कूल यूनिफॉर्म वितरित की। साथ ही कमरों में चित्रकारी कर उसे खूबसूरत बनाया।
-इंदौर कैंसर फॉउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट, राऊ की बाउंड्री वाल पर पेंटिंग की। यहां लोगों से मुलाकात की और वक्त बिताया।
-महू के ज्ञानोदय स्कूल की बाउंड्रीवॉल पर पेंटिंग करने के साथ पौधारोपण भी किया।
-परदेशीपुरा स्थित कल्याण वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ वक्त बिताया और उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्हें बिछाने की चादर भेंट की गई। 
-विजयनगर क्षेत्र स्थित महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ में मोतीचूर के लड्डू बनाना सीखा और बनाए भी। 
-रंगवासा स्थित जैविक ग्राम में पेड की छाल से रस्सी बनाना सीखा। पौधारोपण के लिए गोबर की गेंद बनाकर उसमें बीज रखना सीखा।
-फूटीकोठी रोड़ स्थित मनुवृद्धि केंद्र में बच्चों के साथ खेल गतिविधियां कीं।
-नवलखा स्थित जीवनशाला के बच्चों के साथ पेंटिंग की और विभिन्ना खेल खेले।