नई दिल्ली मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे बजट की तैयारियां इसी महीने से शुरू हो जाएंगी। बजट पेश करने के दौरान सरकार के सामने बढ़ते चालू खाता घाटा को काबू में करना बड़ी चुनौती होगी। साथ ही इस बजट में सरकार खासतौर पर बच्चों और महिलाओं के लिए अलग से रकम व योजनाओं का प्रावधान भी कर सकती है। वित्त मंत्रालय के सर्कुलर के मुताबिक अगले साल फरवरी में पेश होने वाले बजट के लिए बजट पूर्व बैठकों का दौर 14 अक्तूबर से शुरू हो जाएगा।

इन बैठकों में आर्थिक सलाहकार, उद्योग जगत, बैकों, शेयर बाजार, छोटे-मझोले उद्योगों, कृषि क्षेत्र और सामाजिक कामकाज से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ वित्त मंत्री व मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मंथन होगा। इस बजट को लेकर जारी सर्कुलर में सरकार की तरफ से सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए गए हैं कि जेंडर और चाइल्ड स्टेटमेंट एकत्रित किए जाएं, ताकि सरकार को महिलाओं और बच्चों के लिए खास योजनाएं बनाने में मदद मिल सके।

इससे पहले सरकार लोकसभा चुनाव के बाद 5 जुलाई को वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पूर्ण बजट पेश कर चुकी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट को बहीखाता का नाम दिया था। पिछले बजट में सरकारी बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपये देने और किफायती घर के लिए अतिरिक्त छूट जैसे कई बड़े फैसले किए गए थे। हालांकि, जुलाई में पेश हुए बजट के बाद से अगस्त और सितंबर महीने में सरकार ने लगातार राहत पैकेज दिए हैं।

ऐसे में जानकारों को उम्मीद है कि बजट में सरकार उन्हीं योजनाओं की आगे की रूपरेखा और देश में निवेश को बढ़ाने के उपायों पर ध्यान देगी, ताकि पिछले दिनों किए गए राहत के ऐलानों का असर होता दिखे। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ देवेंद्र कुमार मिश्रा के मुताबिक सरकार मध्यम और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने वाले उपायों पर पहले के मुकाबले बेहतर ध्यान देगी। छोटे उद्योगों में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में ही देश में नौकरियों के ज्यादा मौके हैं।

ऐसे में बिना इनकी तरफ ध्यान दिए बजट अधूरा ही रहेगा। वहीं, सरकार के पास डायरेक्ट टैक्स को लेकर बनी टास्क फोर्स की रिपोर्ट भी आ गई है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट में आयकर घटाने के तमाम विकल्पों पर सुझाव दिए गए हैं। सरकार बजट में रिपोर्ट के आधार पर आम लोगों को टैक्स में राहत देने जैसे ऐलान भी कर सकती है।