नई दिल्‍ली. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और पंजाब (Punjab) ने गुरुवार को केंद्र की तरफ से जीएसटी राजस्व और अन्य कोष जारी करने में देरी को लेकर चिंता जतायी है. दोनों राज्यों ने कहा कि इससे उनके कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ (Chief Minister Kamal Nath) ने जीएसटी परिषद (GST Council) के कामकाज के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें जमीनी हकीकत की समझ नहीं है. वैसे आपको बता दें कि सीएम कमलनाथ शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. इस दौरान बाढ़ पीड़ितों की सहायता का मुद्दा अहम होगा.

डब्ल्यूईएफ की मीटिंग में कही ये बात

भारत आर्थिक मंच (WEF) की बैठक में कमलनाथ ने कहा, ‘जीएसटी परिषद में कई राज्य शामिल हैं. ज्यादातर राज्य, केन्द्र सरकार जैसा चाहती हैं. उसी के अनुरूप आगे बढ़ रहे हैं. ऐसा संभवत: उनमें एक पार्टी की सरकार होने की वजह से हो. कुछ राज्यों को छोड़कर अगर ज्यादातर राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार हो तो वे बिना ज्यादा गंभीरता दिखाए पन्नों पर दस्तखत कर सकते हैं. यह पहले से तय होता है, कोई गंभीरता नहीं है. स्थिति की बौद्धिक समझ नहीं है. यह सब अनुमानों में हो रहा है, सब कुछ कागजों पर है. हमें इसे देखना होगा और हम इस पर अपनी आखें बंद नहीं रख सकते.'

कमलनाथ ने की ये मांग

उन्होंने कहा कि जीएसटी का क्रियान्वयन समुचित तरीके से नहीं हो रहा और जल्दी-जल्दी में कई संशोधन किए गये हैं. मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि दुनिया के इतिहास में किसी एक नीति में इतना संशोधन हुआ हो. इसे इस रूप से क्रियान्वित किया गया कि जैसे मानो केंद्र सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी और उन्होंने सभी तथ्यों पर गौर नहीं किया.'

पंजाब के मुख्यमंत्री ने कही ये बात

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह ने भी इसी प्रकार की बात कही. उनके अनुसार राज्यों से यह कहा गया था कि जीएसटी संग्रह का वितरण हर महीने किया जाएगा, लेकिन उसके बाद हर तिमाही और उसके बाद पांच महीने की बात कही गयी. उन्होंने कहा, ‘अब हमें व्यय के लिये कर्ज लेना होता है. जो चीजें हो रही हैं, यह बहुत दु:खद है.'

ये है नियम

जीएसटी व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार को एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) से प्राप्त आय को राज्यों के साथ साझा करना होता है. साथ ही क्षतिपूर्ति कानून के प्रावधानों के तहत राजस्व नुकसान की भी भरपाई करनी होती है.

कमलनाथ ने कहा, ‘कुछ ही महीनों में अगर 300 संशोधन किये गये, तब बुनियादी रूप से कुछ गलत है. हमें केंद्र से जो समर्थन मिलता है, उसमें धीरे-धीरे कमी आ रही है. जबकि मनरेगा के तहत कोष 5-6 महीनों के विलम्ब से आ रहा है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सेहत पर असर पड़ रहा है.'

तेलंगाना के मंत्री ये बोले

तेलंगाना के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के टी रामा राव ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति नहीं मिली. उन्होंने कहा, ‘हमें समवर्ती और केंद्र की सूची से कई विषयों को लेकर राज्यों को देने की जरूरत है. मजबूत राज्यों से ही देश मजबूत होगा.'

 पीएम से करेंगे मुलाकात

मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री कमलनाथ, शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. वह बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए राशि की मांग करेंगे. आपको बता दें कि मध्‍य प्रदेश सरकार ने नुकसान की रिपोर्ट  तैयार कर केंद्र को भेजी है, जिसमें 7154.28 करोड़ रुपए की मदद तत्काल जारी करने की मांग रखी गई है. एनडीआरएफ मद से 6621.28 करोड़ रुपए केन्द्रीय सहायता राशि और एसडीआरएफ से इस साल की दूसरी किश्त की राशि 533 करोड़ रुपए देने की मांग रखी गई है.