प्रदेश में वनाधिकार अधिनियम में निरस्त हुए 3 लाख 60 हजार से अधिक दावों का पुन:परीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए 2 अक्टूबर गाँधी जयंती को वनमित्र एप लाँच किया जाएगा। प्रमुख सचिव आदिम-जाति कल्याण श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने आज यहाँ प्रशासन अकादमी में आदिवासी अंचलों में काम कर रहे स्वयंसेवी संगठनों की कार्यशाला में यह जानकारी दी। श्रीमती रस्तोगी ने कहा कि निरस्त दावों को पुन:परीक्षण के लिये सही तरीके से प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी स्वयंसेवी संगठन की है।
प्रमुख सचिव श्रीमती रस्तोगी ने बताया कि वनाधिकार अधिनियम में प्रदेश में 6 लाख 26 हजार 511 दावे प्राप्त हुए थे। इनमें से 3 लाख 60 हजार 181 दावे निरस्त हो गये थे। उन्होंने कहा कि पुन: परीक्षण अभियान के दौरान व्यक्तिगत दावों को प्राथमिकता दी जाएगी। गाँधी जयंती पर होने वाली ग्राम सभाओं में वन अधिकार समिति के पुनर्गठन पर भी चर्चा होगी। इसमें स्वयंसेवी संगठन आगे रहकर मदद करें। उन्होंने बताया कि एमपी वनमित्र साफ्टवेयर का उपयोग पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होशंगाबाद जिले में शुरू कर दिया गया है। वनाधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के लिये हेल्पलाइन नम्बर जारी किया जा रहा है। उन्होंने निरस्त दावों के पुन:परीक्षण के दौरान वनवासियों को स्वयंसेवी संगठनों द्वारा जागरूक किये जाने पर जोर दिया।
संचालक क्षेत्रीय विकास योजना श्री रवीन्द्र सिंह ने बताया कि होशंगाबाद जिले में 33 ग्राम पंचायतों में 52 वनाधिकार समिति गठित की गई हैं। जिले में निरस्त 1175 दावों में से 650 दावे पुन: पंजीकृत किये गये हैं। संचालक ने बताया कि वनमित्र एप को एमपी ऑनलाइन पोर्टल से लिंक किया गया है। आवेदन करने की प्रक्रिया नि:शुल्क है। वनाधिकार समिति के प्रशिक्षण के लिये 10 गाँवों पर एक क्लस्टर बना कर कार्यवाही की जायेगी।
कार्यशाला में बताया गया कि प्रदेश में वनाधिकार अधिनियम में 2 लाख 66 हजार 208 दावे मान्य किये गये हैं। इनमें आदिवासी वर्ग के 2 लाख 32 हजार 771, अन्य परम्परागत वर्ग के 3 हजार 452 और सामुदायिक प्रकृति के 29 हजार 985 दावे मान्य किये गये हैं। मान्य दावों में से 2 लाख 55 हजार 152 दावों में हक प्रमाण-पत्र वितरित कर दिये गये हैं।