अगले साल होने वाले ओलंपिक खेलों के दौरान गर्मी  को देखते हुए जापान की राजधानी टोक्यो में अब कृत्रिम बर्फबारी का ट्रायल किया गया है। इस ट्रायल को नौकायन टेस्ट स्पर्धा के दौरान किया गया इस दौरान 2020 कर्मचारियों पर हिमपात कराया गया।
आयोजन समिति के सदस्य ताका ओकामुरा ने कहा, ''हम गर्मी  से होने वाली किसी भी चुनौती से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है। यह पूरे वातावरण को ठंडा करने के लिए नहीं हो रहा पर जब बर्फ की फुहारें दर्शकों को छुएंगी तो उन्हें अच्छा लगेगा।'' इसका लक्ष्य खेलों के दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों को गर्मी से राहत दिलाना है। 
इससे पहले डॉक्टरों ने 2020 ओलंपिक के दौरान लू की चेतावनी जारी की थी। 
इन खेलों की तैयारियों के लिए आयोजन समिति जोर-शोर से तैयारियों में लगी है। निर्माण कार्य तय कार्यक्रम के मुताबिक चल रहा है। वहीं आईओसी के अध्यक्ष थामस बाक ने कहा कहा है कि उद्घाटन समारोह में एक साल से भी कम समय बचा है पर टोक्यो सबसे अच्छा मेजबान बनने को तैयार है।
दोस्त बनेंगे रोबॉट और तैरते होटलों में रुकेंगे मेहमान
1964 में जब पहली बार टोक्यो में ओलिंपिक खेलों का आयोजन हुआ था, तब इस शहर ने दुनिया को नए जापान से रू-ब-रू कराया था। जापान ने तब दुनिया को दिखाया था कि वह दूसरे वर्ल्ड वार की बर्बादी से उबर चुका है और तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। अब करीब आधी सदी के बाद ओलिंपिक खेल दोबारा टोक्यो लौट रहे हैं। ओलिंपिक खेलों के स्वागत में पूरे जोश के साथ जुट चुका टोक्यो एक बार फिर जापान की शानदार इमेज प्रस्तुत करेगा। टोक्यो का दावा है कि ये खेल अब तक इतिहास में 'सर्वाधिक प्रगतिशील' साबित होंगे। इस बार ओलिंपिक खेलों के लिए रोबोट को मैस्कॉट्स (शुभंकर) चुना गया है। मिराइतोवा और सोमेइटी (रोबोट के नाम) को क्रमश: तोक्यो 2020 ओलिंपिक और पैरालिंपिक के लिए मैस्कॉट होंगे। ये मेस्कॉट यहां आए ऐथलीट्स और अतिथियों का स्वागत करेंगे। जापान ने ओलिंपिक के लिए रोबॉट्स को लेकर और भी खास इंतजाम किए हैं। ओलिंपिक खेलों की कुछ प्रतिस्पर्धाओं में ये रोबॉट्स ही सहायक की भूमिका निभाएंगे। हैमर और जैवलिन थ्रो जैसे खेलों में ये रोबॉट्स ही हैमर और जैवलिन को वापस लाते दिखेंगे। वर्चुअल वर्ल्ड में दुनिया भर से लोगों को इन खेलों के करीब लाने की जिम्मेदारी भी रोबॉट्स को सौंपी गई है।
1964 ओलिंपिक खेलों के लिए जापान ने जिस स्टेडियम का इस्तेमाल किया था। अब वहां पर नया नैशनल स्टेडियम बनाया जा रहा है। इस स्टेडियम को 1.25 डॉलर (करीब 90 अरब रुपये) की लागत से तैयार किया जा रहा है। इस स्टेडियम में ओलिंपिक खेलों की ओपनिंग-क्लोजिंग सेरिमनी के अलावा कई खेलों का आयोजन होगा। ओलिंपिक खेलों के इतिहास में यह पहली बार होगा, जब इन खेलों के लिए पृथ्वी की कक्षा में एक खास सैटेलाइट स्थापित किया जाएगा। इस सैटलाइट को इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन तक रॉकेट द्वारा पहुंचाकर लॉन्च किया जाएगा।
इन खेलों में 206 देशों के 11 हजार से ज्यादा ऐथलीट्स हिस्सा लेने पहुंचेंगे। इस दौरान यहां 339 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। यह ओलिंपिक खेलों में अब तक के सबसे ज्यादा मेडल हैं, जो किसी एक ओलिंपिक खेल में दांव पर होंगे। ओलिंपिक इतिहास में यह पहली बार है, जब इन खेलों के लिए रिसाइकल्ड मेटल्स का इस्तेमाल किया गया है। मोबाइल रिसाइकल्ड के जरिए तोक्यो ओलिंपिक के सभी मेडल तैयार किए गए हैं। इस मुहिम में पुराने गैजेट्स से 32 किलो सोना, 3,500 किलो चांदी और 2,200 किलो तांबा निकाला गया। ओलिंपिक खेलों से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन खेलों के दौरान प्रतिदिन 14 हजार होटल के कमरों की कमी होगी। टोक्यो ने इससे निपटने के भी शानदार इंतजाम कर लिए हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए जापान अपने जहाजों को इस्तेमाल में लाएगा। बड़े-बड़े क्रूज में होटल तैयार किए जा रहे हैं, जो तोक्यो की खाड़ी में तैनात किए जाएंगे। शुरुआत में जब इन खेलों के आयोजन की तैयारियां शुरू हो रही थीं तब इन खेलों की लागत 6.6 बिलियन डॉलर (करीब पौने 5 खरब रुपये) का अनुमान जताया गया था, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 20-30 बिलियन डॉलर (14-21 खरब रुपये) तक पहुंच चुका है।