डिंडोरी जिले के करंजिया गांव (Karanjia Village, Dindori) के बुधराम मार्को को तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) ने पाकिस्तानी जेल (Pakistan Jail) से आज़ाद (Release) कराया था. उस वक्त जिले के अफसरों और नेताओं ने बुधराम की वापसी को बड़ी उपलब्धि बताते हुये खूब वाहवाही लूटी थी. उनकी मदद के दावे भी किए थे, लेकिन उनकी रिहाई के बाद किसी ने उनकी सुध नहीं ली, यहां तक कि उन्हें सरकार की पीएम आवास (PM aawas yojna) समेत किसी भी योजना का लाभ भी उन्हें नहीं दिया गया. बुधराम के कच्चे मकान का एक हिस्सा गिर चुका है. उनकी बुजुर्ग मां जैसे तैसे अपना और बीमार बेटे का पालन पोषण कर रही है. परिजनों ने सरकार ने मदद की गुहार लगाई है.

ऐसे पहुंचे थे पाकिस्तान 

करंजिया सुहारिन टोला के आदिवासी युवक बुधराम मार्को की कक्षा 10वीं में 3 बार फेल होने से मानसिक स्थिति खराब हो गई थी, जिसके बाद वो घर से भागकर पंजाब से पाकिस्तान की सीमा में चले गए थे. उन्हें 5 जुलाई 2012 को पाकिस्तानी फौज ने गिरफ्तार कर लिया था. बुधराम पर अवैध रूप से पाकिस्तान सीमा में घुसने का मामला दर्ज़ किया गया था. 10 जुलाई 2012 को पाक अदालत ने उसे एक साल कैद व एक हजार रूपये अर्थदंड से दण्डित किया था. इस हिसाब से उसकी सज़ा 10 जुलाई 2013 को पूरी होनी थी लेकिन परिवार की इतनी हैसियत नहीं थी कि वे सरहद पार करके पाकिस्तान से बुधराम को छुड़ा सकें. इस कारण बुधराम को 2 साल 4 महीने जेल में बिताने पड़े. जेल में रहने के दौरान आईबी की टीम बुधराम के घर पहुंची थी तब जाकर परिवार को पता चला था कि वो पाकिस्तान की जेल में कैद हैं.
सुषमा स्वराज ने छुड़ाया था

तत्कालीन सांसद बसोरी सिंह मसराम ने बुधराम को छुड़ाने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था. केंद्र में सरकार बदलने के बाद तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधराम को भारत वापस लाने में अहम भूमिका निभाई थी. बुधराम को जब पाकिस्तान से भारत वापस लाया गया था तब डिंडौरी में 'मध्य प्रदेश के इस सरबजीत' का भव्य स्वागत किया गया था, साथ ही उनकी मदद के लिये बड़े बड़े दावे किये गये थे लेकिन मदद मिलना तो दूर 5 साल गुजरने के बाद आजतक कोई नेता या अफसर बुधराम की सुध लेने नहीं पहुंचा. बुधराम की हालत इतनी खराब हो गई है कि वो कुछ बोल भी नहीं पाते हैं.