चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) का लैंडर विक्रम (Lander Vikram) चांद की सतह से केवल 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था तभी उसका संपर्क इसरो के कंट्रोल रूम से टूट गया. लेकिन कल यानी रविवार को इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने बतया की ऑर्बिटर की मदद से चांद की सतह पर विक्रम मॉड्यूल के लोकेशन का पता चला चुका है. उन्होंने बताया कि ये एक हार्ड-लैंडिंग रहा होगा, जबकि योजना सॉफ्ट-लैंडिंग कराने की थी. साथ ही सिवन ने बताया कि ये एक कठिन लैंडिंग रहा होगा.

लैंडर के लोकेशन का पता चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर के ऑन-बोर्ड कैमरे से कैप्चर की गई तस्वीरों से चला. ऑर्बिटर सही ढंग से चांद की चारों ओर अपनी कक्षा में चक्कर लगा रहा है. हालांकि, चंद्रयान 2 की ऑर्बिटर के द्वारा लैंडर विक्रम के लोकेशन का पता लगाने के बाद भारतीयों को उम्मीद की एक किरण दिखाई देने लगी. लोगों ने उम्मीद जताई तकि लैंडर विक्रम से संपर्क फिर से स्थापित हो सकता है. हालांकि, लैंडर के लोकेशन का पता चलने की खुशी में कई लोग अतिउत्साह में आ गए, और "विक्रम लैंडर स्पॉटेड" के नाम से नासा की कई पुरानी तस्वीरें शेयर करने लगे. वो इस तस्वीरों को इसरो प्रमुख द्वारा जारी किए जाने की भी बात कर रहे हैं. ऐसी कई तस्वीरें देखते ही देखते ट्विटर पर ट्रेंड भी करने लगीं.
इन तस्वीरों के रिवर्स गूगल सर्च करने पर पता चलता है कि ये अपोलो 16 लैंडिंग साइट की तस्वीर है. इसरो के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने मीडिया को बताया कि ये तस्वीरें फेक हो सकती है. ऑर्बिटर द्वारा भेजे जाने वाली थर्मल फोटो तीन दिनों के बाद ही संभव हो सकेगा, क्योंकि एक ऑर्बिटर को एक ही पॉइंट पर आने में तीन दिन लगते हैं.