ग्वालियर की निचली अदालत ने तीन चिकित्सकों को गर्भस्थ शिशु के लिंग परीक्षण व भ्रूण हत्या का दोषी मानते हुए तीन-तीन वर्ष जेल की सजा सुनाई है। 2009 के इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्राची पटेल ने सोमवार को सुषमा त्रिवेदी, संध्या तिवारी और एसके श्रीवास्तव को पीसीपीएनडीटी एक्ट में दोषी करार दिया।
इन चिकित्सकों ने कोर्ट से रहम की अपील करते हुए कहा था कि उन्हाेंने पहली बार यह अपराध किया है, लेकिन अभियोजन पक्ष का कहना था कि सुषमा त्रिवेदी, संध्या तिवारी और एसके श्रीवास्तव को केवल जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया तो समाज व चिकित्सा पेशे में गलत संदेश जाएगा। जज ने रहम न करते हुए तीनों को ही तीन साल के लिए जेल भेज दिया। साथ ही तिवारी व श्रीवास्तव को अवैध क्लीनिक चलाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

मामला एक नजर में
सरकारी वकील रितेश गोयल के अनुसार दिल्ली की बेटी बचाओ समिति ने 2009 में इन डॉक्टरों पर अलग-अलग स्टिंग ऑपरेशन किए थे। तीनों ने अपने क्लीनिकों में लिंग परीक्षण व भ्रूण हत्या करने की सहमति दी थी। समिति ने डीएम को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद सीएमओ ने तीनों के खिलाफ केस दर्ज किया था।