मध्य प्रदेश में इस साल भारी बारिश के बाद नदी-नाले उफन पड़े हैं और कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं. संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं और पुल पुलिया पर पानी बह रहा है. लेकिन आवाजाही तो रुक नहीं सकती इसलिए लोग अपनी जान पर खेलकर एक से दूसरी पार जा रहे हैं.ज़रा-सी चूक जान पर भारी पड़ सकती है.दतिया ज़िले में भी ख़तरों से खेल रहे लोग नज़र आ रहे हैं. ज़िले के सबसे बडे गांव उनाव में तो नदी पर पुल ही नहीं है.इसलिए गांव वाले रोज़ हथेली पर जान रखकर नदी के पार आ जा रहे हैं. और अगर ऐसे में अगर कोई बीमार पड़ जाए या किसी की मौत हो जाए, तो उस मुश्किल का कोई अंदाज भी नहीं लगा सकता.गांव वाले टायर ट्यूब के भरोसे रहते हैं. बच्चे हों या बड़े सब ट्यूब के सहारे ही नदी पार करते हैं. स्कूल जाना हो या हाट-बाज़ार ये नदी पार करना ही पड़ती है. दिन भर छोटे-छोटे बच्चे और बड़े बुज़ुर्ग अपनी जान से खिलवाड़ करते देखे जा सकते हैं. ये इनकी मजबूरी भी है.
जब इस गांव में किसी की मौत हो जाती है तो और गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है. श्मशान घाट और कब्रिस्तान दोनों ही नदी के उस पार हैं. बाढ़ और बरसते पानी के बीच गांव वाले भगवान का नाम लेकर शव को ऊपरवाले का नाम लेकर मुश्किल से पार ले जाते हैं. नदी पार करने के दौरान कई हादसे भी हो चुके हैं.
ये वो ज़िला है जहां से शिवराज सरकार में लगातार मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा विधायक हैं. गांव वाले कलेक्टर से लेकर विधायक और मंत्री तक से कई बार पुल बनवाने की मांग कर चुके हैं.