बिलासपुर । छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर एवं कमेटी फॉर मॉनिटरिंग द मिडियेषन सेंटर, छ.ग. उच्च न्यायालय, बिलासपुर के संयुक्त तत्वाधान में छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न जिलों के 42 न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं के लिए आयोजित 40 घंटे के मिडियेषन प्रषिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम विगत 3 अगस्त से प्रारंभ किया गया था। समापन समारोह न्यायमूर्ति पी. आर. रामचन्द्र मेनन, मुख्य न्यायाधीष, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, छ.ग.राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य आतिथ्य एवं न्यायमूर्ति प्रषांत कुमार मिश्रा, न्यायाधीष, छ.ग. उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्षता तथा न्यायमूर्ति पी. सेम कोषी, न्यायाधीष, छ.ग. उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, कमेटी फॉर मॉनिटरिंग द मिडियेषन सेंटर, न्यायमूर्ति आर.सी.एस. सामंत, न्यायाधीष, छ.ग. उच्च न्यायालय एवं सदस्य कमेटी फॉर मॉनिटरिंग द मिडियेषन सेंटर की विषिश्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति पी.आर. रामचन्द्र मेनन, मुख्य न्यायाधीष, ने अपने उद्बोधन में मीडियेषन के महत्व पर प्रकाष डालते हुए कहा कि हमे हरेक चीज से सीख लेनी चाहिए।  मीडियेषन, मामलों की त्वरित निराकरण में सहायक सिद्ध हो सकता है। उन्हांने महाभारत के समय भगवान श्रीकृश्ण के द्वारा कौरव एवं पाण्डव के मध्य हुए विवाद को मीडियेषन के माध्यम से सुलाझाये जाने के सप्रयास कीओर ध्यान आकृष्ठ कराते हुए मीडियेषन प्रक्रिया को प्राचीनतम समय का होना बताया। मीडियेषन से जटिल से जटिल समस्याओं का निराकरण हो जाता है।  इसकी खास बात यह है कि इसमें किसी पक्षकार की हार नहीं होती है। दोनेां पक्षकार एक निर्णय पर पहुंचते है।  इस प्रकार दोनों ही पक्षों की जीत होती है। न्यायमूर्ति प्रषांत मिश्रा ने कहा कि मीडियेषन में मिडियेटर एक निश्पक्ष व्यक्ति होता है। जिसमें जज या अधिवक्ता को 40 घंटे का प्रषिक्षण देकर मीडियेटर बनाया जाता है और पक्षकार एवं मिडियेटर के बीच हुई चर्चा उपरांत पक्षकार स्वयं निर्णय लेते हैं। मीडियेटर इसमें तृतीय पक्ष होता है, जो एक मध्य का रास्ता प्रस्तुत करता है। जिसमें पक्षकारों के बीच निगोषियेषन एवं बारगेनिंग भी होती है। न्यायमूर्ति पी. सेम कोषी, न्यायाधीष ने कहा कि  काफी संख्या में अधिवक्ताओं ने इसमें रूचि दिखाई है। इन 5 दिनों में प्रषिक्षण कार्यक्रमों में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। उन्होंने न्यायाधीषों से अधिक से अधिक प्रकरणों को मिडियेषन के लिए रिफर करने का आव्हान किया। कमेटी फॉर मॉनिटरिंग द मिडियेषन सेंटर, छ.ग. उच्च न्यायालय, बिलासपुर के सदस्य न्यायमूर्ति आर.सी.एस. सामंत ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने मीडियेषन की प्रक्रिया पर प्रकाष डालते हुए नई दिल्ली से आये आब्जर्वर एवं अन्य राज्यों से आये पोटेन्षियल टेऊनरों के द्वारा दिये गये टेऊनर पर संतोश व्यक्त करते हुए कहा कि यहां दिये गये प्रषिक्षण का लाभ उठाये और अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण में प्रयास करें। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाशण संजय कुमार जायसवाल, सचिव कमेटी फॉर मानिटरिंग द मिडियेषन सेंटर के द्वारा दिया गया।  प्रषिक्षण कार्यक्रम का आभार प्रदर्षन सिद्धार्थ अग्रवाल, सदस्य सचिव, छ.ग.राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा दिया गया।   कार्यक्रम का संचालन द्विजेन्द्र, सिविल जज बिलासपुर के द्वारा किया गया। 40 घंटे के मिडियेषन प्रषिक्षण में टेऊनर के.के. मखीजा, अब्र्जवर, दिल्ली से, सुश्री बलबीर कौर गांधी पोटेंषियल टेऊनर हरियाणा, अषोक कुमार राय पोटेंषियल टेऊनर झारखण्ड, सुश्री आरती षर्मा पोटेंषियल टेऊनर मध्यप्रदेष से, सुश्री अनुपम धींगरा, आब्र्जवर, नई दिल्ली से, यषपाल सिंह डाहिया पोटेंषियल टेऊनर हरियाना, राजेष दास पोटेंषियल टेऊनर झारखण्ड, भैया मुकेष कुमार पोटेंषियल टेऊनर झारखण्ड के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रषिक्षण कार्यक्रम छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सभागार में 03  से 07 अगस्त 2019  तक दो बैच में चला जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न जिलों के 16 न्यायिक अधिकारीगण  एवं 26 अधिवक्ताओं ने भाग लिया। प्रषिक्षण कार्यक्रम में विषिश्ट रूप से न्यायमूर्ति मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल, न्यायमूर्ति षरद कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति आर.पी. षर्मा, न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल, न्यायमूर्ति पी.पी. साहू, न्यायमूर्ति गौतम चैरडिया, न्यायमूर्ति श्रीमती विमला सिंह कपूर न्यायमूर्ति श्रीमती रजनी दुबे उपस्थित रहीं साथ ही रविषंकर षर्मा, प्रमुख सचिव, विधि विभाग, एन.सी. सांखला, रजिस्ट्रार जनरल, एन.डी. तिगाला, जिला न्यायाधीष,  के.एल.चरियाणी, निदेषक, न्यायिक एकडेमी, दीपक तिवारी रजिस्ट्रार (विजिलेंस), रजिस्ट्री, एकेडमी, जिला न्यायालय के न्यायिक अधिकारीगण, वरिश्ठ अधिवक्तागण, अधिवक्तागण इत्यादि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।