जबलपुर। जिस बीज को पर्यावरण व वन मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रूवल कमेटी ने अनुमति नहीं दी है। ऐसे अनाधिकृत जीएम व एचटीवीटी बीजों को किसानों तक पहुंचाने वाली कंपनियों व संस्थाओं पर सरकार को सख्त कार्यवाही करना चाहिये। उक्त बातें भारतीय किसान संघ के राष्टीय मंत्री व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रमंडल सदस्य के. सांई रेड्डी ने पत्रकार वार्ता में कहीं। श्री रेड्डी ने कहा कि भारतीय किसान संघ सरकार से मांग करता है कि जो जेनेटिक इंजीनिरिंग एप्रूवल कमेटी इन बीजों की निगरानी हेतु अधिकृत है, वह अभी तक चुप है व कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में हैं। इसलिये ऐसी गैर जिम्मेदार संस्थाओं को बर्खास्त करते हुये नई संस्था का गठन किया जाये।
श्री रेड्डी ने बताया कि भारतीय किसान संघ अनाधिकृत जीएम/एचटीवीटी बीज कंपनियों के खिलाफ 9 अगस्त 2019 को सभी तहसीलों में धरना व प्रदर्शन का आयोजन करेगा। इस अवसर पर भारतीय किसान संघ के प्रदेश कोषाध्यक्ष ओमनारायण पचोरी , प्रांत अध्यक्ष विजय गोंटिया, प्रांत प्रचार प्रमुख राघवेंद्र सिंह पटेल, प्रमोद चोधरी, प्रांत मंत्री प्रहलाद पटैल, वीरेन्द्र रघुवंशी, जिलाध्यक्ष मोहन तिवारी, पुष्पेंद्र तिवारी आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
- संसद में ’’बीज किसानों का अधिकार है’’ नाम से बिल लाये सरकार।
भारतीय एग्रो इकानामिक रिसर्च सेंटर के राष्टीय महामंत्री प्रमोद चौधरी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि भारतीय किसान संघ ने अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पारित कर सरकार से मांग करते हुये कहा कि सरकार यह चाहती है कि किसानों की आय दोगुना हो तो ’’बीज किसानों का अधिकार है’’ नाम से बिल संसद में लेकर आये। श्री चौधरी ने कहा कि इस कानून में बीज बनाना, भंडारण करना, क्रय विक्रय, किसानों के अधिकार में ही रहे। साथ ही बीजों का परिस्करण व वृद्विकरण किया जाये। सरकार देश के सभी विश्वविद्यालय, शोध केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र आदि में इस दिशा में कार्य करने की क्षमता विकसित करे और इन संस्थानों के माध्यम से किसानों को सीधे फाउंडेशन बीज उपलब्ध कराया जाये। सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये किसानों को बीज बनाने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दे तथा अधिसूचित बीजों के बाहर की कंपनियां बीज बाजार में न बेंच सके, इसका प्रावधान कानून में किया जाये।