बेंगलुरू: कर्नाटक विधानसभा (विधान सौधा) में शक्ति परीक्षण की मांग करते हुए बीजेपी विधायकों ने पूरी रात सदन के भीतर 'धरना' दिया. उसके बाद कुछ बीजेपी विधायक सुबह की सैर करते देखे गए. इस बीच कर्नाटक के राज्‍यपाल वजुभाई वाला ने मुख्‍यमंत्री एचडी कुमारस्‍वामी को पत्र लिखकर शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे सदन में विश्‍वास मत हासिल करने को कहा है.

परीक्षा की घड़ी
राज्यपाल के इस निर्देश के बाद कर्नाटक में 13 महीने पुरानी कांग्रेस-जनता दल सेक्यूलर गठबंधन सरकार के सामने अब परीक्षा की घड़ी उपस्थित हो गई है. इससे पहले कर्नाटक विधानसभा को गुरुवार को सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद (एस) व विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के विश्वास मत प्रस्ताव पर देरी करने को लेकर हंगामे के बाद विधानसभा को 30 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया. बाद में शाम में इसे शुक्रवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
हालांकि दिन में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने अपनी गठबंधन सरकार का सदन में बहुमत साबित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया. विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने सदस्यों से कहा, "मैं सदन को 30 मिनट के लिए स्थगित करता हूं, ऐसा भाजपा के शक्ति परीक्षण की मांग के अव्यवस्था के कारण है और कांग्रेस बिना चर्चा के इसका विरोध कर कर रही है." इस दौरान सत्तारूढ़ सहयोगी दल के विधायक सदन के वेल में जमा हो गए थे.
कुमारस्वामी ने सुबह 11 बजे विश्वास मत प्रस्ताव पेश किया और इस पर बोलना शुरू किया. कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) नेता सिद्धारमैया ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से एक बिंदु उठाया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया कि सत्तारूढ़ सहयोगी के 15 बागी विधायक सत्र में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं है और पार्टी व्हिप उन पर लागू नहीं होगा.


तत्‍काल शक्ति परीक्षण की मांग
सिद्धारमैया ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए समय लिया और दूसरी पार्टी के सदस्यों ने इसमें समय लिए जाने पर दखल दिया. स्पष्ट रूप से इससे विश्वास मत परीक्षण में देरी हो रही थी. बहुत से भाजपा सदस्यों ने सत्तारूढ़ सहयोगी दल के समय गंवाने की इस युक्ति का विरोध किया. भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष से तत्काल शक्ति परीक्षण कराने का आग्रह किया. विश्वास मत परीक्षण में देरी हो रही थी और इसके बाद सदन दो दिन के सप्ताहांत के बाद सोमवार को शुरू होगा.

करीब 20 विधायकों, जिसमें 15 बागी, दो कांग्रेस सदस्य श्रीमंत पाटिल व बी.नागेंद्र, दो निर्दलीय (आर.शंकर व एच.नागेश) व एक बसपा (एन.महेश) विधायक के विधानसभा से दूर रहने के साथ भाजपा सदस्यों ने सत्तारूढ़ सहयोगियों पर हार के डर से जानबूझकर विश्वासमत परीक्षण में देरी करने का आरोप लगाया.