मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने केन्द्रीय वित्त मंत्री सुश्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज संसद में प्रस्तुत बजट 2019-20 को शब्दों का मकड़जाल बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट कम भाषण ज्यादा है। बजट के महत्वपूर्ण बिन्दुओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट युवाओं, किसानों और मध्यम वर्ग को बेहद निराश करने वाला है। जनता अपने आपको ठगा-सा महसूस कर रही है। जैसा कि केन्द्र की सरकार की पहचान नये जुमले बनाने वाली सरकार के रूप में होने लगी है, इस बजट में भी कोई ठोस बात नहीं की गई है। पिछले कार्यकाल की बातें दोहराने की नाकाम कोशिश की है। जो काम मामूली सुधार से हो सकते थे उन्हें बजट में शामिल कर ध्यान भटकाने की कोशिश हुई है।

मुख्यमंत्री श्री नाथ ने कहा कि देश को अपेक्षा थी कि बजट में किसानों के दुख:-दर्द को दूर करने वाले उपायों के बारे में उल्लेख होगा। बेरोजगारी दूर करने और युवाओं के सपनों को साकार करने के बारे उल्लेख होता। अनुसूचित वर्गों के विकास की चर्चा होती। इन बिन्दुओं पर बजट ने निराश किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट से एक बात साफ हो जाती है कि चंद महीने पहले पेश किये गये अंतरिम बजट में राज्यों को जो हिस्सा मिलना था उसे कम कर दिया गया है। मध्यप्रदेश के हिस्से के 2677 करोड़ रूपये कम कर दिये गये हैं। शायद इसी कारण वित्त मंत्री ने महत्वपूर्ण योजनाओं और खर्च के संबंध में चुप रहना ही ठीक समझा। इससे केन्द्र सरकार के बेहद खराब आर्थिक प्रबंधन की झलक मिलती है। बजट से सरकार के आर्थिक वृद्धि दर के गलत आंकड़े भी सामने आये हैं।

मुख्यमंत्री श्री नाथ ने कहा कि बजट के पहले उम्मीद थी कि पेय जल के लिये नये मेगा प्लान की घोषणा होगी जिससे लोगों की जल समस्या दूर होगी। इसके विपरीत वित्त मंत्री के बजट भाषण में इस संबंध में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर विशेष एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने से आम लोगों का जीना मुश्किल हो जायेगा। इससे व्यापार पर विपरीत प्रभाव तो पड़ेगा ही साथ ही महँगाई भी बढ़ेगी। यह ऐसा बजट है जो महँगाई बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि हाल में चुनाव में विकास के सभी जरूरी मुद्दों को दरकिनार किया गया और अब नये भारत का जुमला बनाकर फिर से जनता को परोसा गया है। गरीबी, महँगाई और बेरोजगारी के साथ नया भारत कैसे बनेगा, इसका कोई रोडमैप बजट में नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के उपायों और युवाओं को आगे बढ़ने के मौके देने के बारे में बजट में कोई ठोस बात नहीं है। मीडिया और बीमा क्षेत्र को विदेशी पूंजी निवेश के लिए खोलने का कदम 'मेक इन इंडिया' के विपरीत है क्योंकि इससे देश की प्रतिभाओं को अनावश्यक प्रतियोगिता का दबाव सहना पड़ेगा। स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को भी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गाँव, गरीब और किसान की बातें 2014 से हर साल हो रही हैं लेकिन इस बजट में भी उनके लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।