पटना । बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने बताया कि बिहार सरकार ने एईएस यानि चमकी बुखार से बच्चों की होने वाली मौत के मामले में कई प्रयास किये हैं। मंगलवार को विधान परिषद में कांग्रेस के प्रेमचंद्र मिश्रा के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब देते हुए पांडेय ने कहा कि इस साल हाइपो ग्लाइसिमिया से सबसे ज्यादा मौत हुई है, जिससे बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया है। उन्होंने बताया कि 2013 से एईएस के मामले में एसओपी बना हुआ है। साथ ही 2018 में नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजीयर्स बना हुआ है। जिलों में दवाईयों और इलाज की सुविधाओं के लिए जल्द ही नया मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया जा रहा है और इसी एप्लिकेशन के जरिये मॉनिटरिंग की जाएगी।
पांडेय ने कहा कि एसकेएमसीएच में नोडल एजेंसी लागू किया जाएगा। योजाना है कि 5 नए वायरोलॉजी केंद्र बनाए जाएं। अगले साल बेहतर व्यवस्था करने का आश्वासन देते हुए मंगल पांडेय ने कहा कि 5 जून तक सिर्फ 6 मरीज ही एसकेएमसीएच में आये, लेकिन 6 जून के बाद लगातार मरीजों की संख्या बढ़ी। पांडेय ने बताया कि एसकेएमसीएच में 110 बेड वालाआईसीयू जल्द ही बनेगा, जबकि सुपर स्पेशलिस्ट ब्लॉक नवंबर 2019 तक पूरा होगा। मंगल पांडेय ने कहा कि बाकी जिलों में 10 हजार आईसीयू बेड का निर्माण होगा। हमारी योजना इस बीमारी से प्रभावित जिलों में पूरी व्यवस्था देने की है।
स्वास्थ्य मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2012 में 34 प्रतिशत मृत्यु दर रहा था, लेकिन 2018 में 27 प्रतिशत मृत्यु दर रहा। वहीं 2019 में 154 बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि इस साल सरकार के प्रयासों के कारण ही मृत्यु का प्रतिशत कम हुआ है। कार्यवाही के दौरान मंगल पांडेय को राजद ने बीच में बोलने से रोका और इस्तीफा मांगा। राजद के सदस्यों ने मंगल पांडेय से गलती मानने को कहा इसको लेकर परिषद में राजद का हंगामा जारी रहा। सदन में पूरा हंगामा सीएम नीतीश कुमार की मौजूदगी में हुआ।