कोलकाता। राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में चार दिनों से जारी डॉक्टरों की हड़ताल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने को कहा कि मेडिकल क्षेत्र में अधिक से अधिक स्थानीय छात्रों को ही मौका देने या उनके लिए जगह बनाने के लिए उनकी सरकार कानून में संशोधन करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र इंटर्न के रूप में काम कर रहे हैं जो स्थानीय बांग्ला भाषा नहीं जानते हैं। मुझे लगता है कि इस प्रणाली को बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय से ज्यादा अब दूसरे राज्यों के छात्र ही इस क्षेत्र में आ गए हैं जो ठीक से बांग्ला भाषा नहीं जानते हैं जिसके कारण वे रोगियों के साथ संवाद नहीं कर पाते हैं।

एसएसकेएम अस्पताल का जायजा लेने आई मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अब कानून में संशोधन करेगी और मेडिकल क्षेत्र में 20 फीसद से अधिक स्थानीय छात्रों के प्रवेश की अनुमति देगी। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि हम ऐसा करेंगे और इसके लिए निर्देश भी दे दिया है।

ममता ने कहा कि राज्य सरकार डॉक्टर बनाने के लिए प्रत्येक मेडिकल छात्र पर 25 लाख रुपये खर्च करती है और डॉक्टर बनने के बाद वे दो से तीन साल के बांड पर हस्ताक्षर करते हैं और इस अवधि के पूरा होते ही छोड़कर दूसरी जगह चले जाते हैं। इसके कारण राज्य में चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होती है।