भोपाल। भाजपा की रातों की नींद एवं दिन का चैन सत्ता की बत्ती गुल होने से चला गया है। प्रदेश भाजपा नेताओं को अपने भविष्य में अंधियार ही अंधियार दिखाई दे रहा है। बदहवासी का आलम यह है कि शुतुर मुर्गी अंदाज में भाजपा नेता आंखे बंद करके अंधेरे का राग अलाप रहे हैं। 
जैसे-जैसे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री ‘प्रगतिनाथ जी‘ के नेतृत्व में प्रदेश आगे बढ़ रहा है। भाजपा नेताओं की बेचेनी बढ़ती जा रही है। कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा एवं मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे की संयुक्त पत्रकार वार्ता पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार को विरासत में जो मिला था वह था आर्थिक बदहाली, अपराधिक अराजकता, गर्त में गिरे हुए सामाजिक सूचकांक और भीषणतम भ्रष्टाचार। कमलनाथ जी की सरकार ने बीते छः माह में वह कर दिखाया जो आजाद भारत के इतिहास में किसी राज्य ने इतनी तीव्रता से नहीं किया। 
आज मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि 10 जून 2019 को पिछले वर्ष की तुलना में अर्थात 10 जून 2018 की अपेक्षा बिजली की खपत में 48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विद्युत वितरण कंपनी के आंकड़े बताते है कि जहां 10 जून 2018 को 1.246 लाख यूनिट विद्युत की खपत दर्ज की गई थी, वह 10 जून 2019 को 2114 लाख यूनिट दर्ज की गई। अर्थात 48 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश समृद्धि की और तेजी से बढ़ रहा है। इस्ट जोन में यह वृद्धि 53 प्रतिशत, सेन्ट्रल जोन मेे 67 प्रतिशत और वेस्ट जोन में 30 प्रतिशत अर्थात कुल 48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अगर मेगावाट में देखे तो 10 जून 2018 को 7099 मेगावाट विद्युत की खपत हुई थी, जो 10 जून 2019 में 9445 मेगावाट दर्ज की गई। अर्थात 2346 मेगावाट अधिक आपूर्ति कांग्रेस की सरकार ने भाजपा सरकार की अपेक्षा की। जून के ही आंकड़े दर्शाते है कि 1 से लेकर 10 जून तक लगातार 16 से 48 प्रतिशत की वृद्धि रोज दर्ज की जा रही है। किसी भी राज्य की प्रगति का मूल्यांकन करना हो तो उसकी प्रति व्यक्ति विद्युत खपत की दर से किया जा सकता है। इतना ही नहीं बीते छः माह में अपराध दर में कमी आना खासकर महिला अपराधों में, यह भी प्रदेश की प्रगति एवं समृद्धि की और इशारा करता है।
बीते कुछ दिनों से सत्ता जाने से हताश और निराश भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में यह भ्रामक प्रचार कर रही है कि कांग्रेस सरकार विद्युत कटौती कर रही है, क्योंकि बिजली की उपलब्धता नहीं है। उपरोक्त आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि भाजपा सरकार की तुलना में बहुत अधिक बिजली की उपलब्धता कांग्रेस सरकार में सुनिश्चित की जा रही है। एक बेहद चैकाने वाला तथ्य और प्रकाश में आया है कि भाजपा शासन काल में विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा कांग्रेस शासन की तुलना में अधिक बिजली काटी जाती थी। सुपरवाईजरी कन्ट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन की इंदौर, भोपाल और जबलपुर वृत की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि 0 से 5 मिनिट से लेकर एक घंटे तक विद्युत की आपूर्ति विभिन्न फीडरों के माध्यम से भाजपा शासनकाल में अधिक बाधित होती थी। रिपोर्ट संलग्न।
वर्तमान में व्यवस्था यह है कि 33/11 केवी सब स्टेशन पर फीडर ट्रिप होता है तो फीडर फाॅल्टी होने की रिपोर्ट स्वतः ही जारी होती है और इसको मानीटर करने वाला आॅपरेटर संबंधित टीम को सूचित करता है, जिसे 30 मिनिट से लेकर 2 घंटे के बीच अटेण्ड करके ठीक कर लिया जाता है। मगर यदि डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर के स्तर पर कोई खराबी है तो उसकी सूचना उपभोक्ताओं को उनके घरों की लाईट जाने पर 1912 नंबर पर सूचित करना होता है। इसके पश्चात ही वह कम्पलेन्ट अटेण्ड हो पाती है। कमलनाथजी ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए यह सैद्धांतिक निर्णय लिया है कि अब 11/0.4 केवी डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर पर एक ऐसा डिवाईस लगाया जाएगा जिससे उपभोक्ताओं की लाईट जाने पर वह डिवाईस खुद ही इस बात की सूचना देगा कि किस क्षेत्र की सप्लाई बंद है और फिर उस क्षेत्र की सप्लाई को पुनः तुरंत चालू किया जा सकता है। अभी इसके पायलट प्रोजेक्ट पर काम प्रारंभ किया जाएगा। तत्पश्चात व्यापक रूप से इस योजना को आकार दिया जाएगा।