जयपुर । पूरे प्रदेश में जलसंकट गहराया हुआ है खुद मुख्यमंत्री इसको लेकर भी गंभीर है और लदाय विभाग के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है लेकिन सीएमओ द्वारा कलेक्टर्स से प्राप्त फीडबैक कुछ अलग ही बात कहता है। प्रदेश के 33 में से 11 जिला कलक्टर का मानना है कि उनके जिले में पेयजल को लेकर कोई समस्या नहीं है खास बात यह है कि जिन कलक्टर्स ने यह बात कहीं है वहां पर जनता पानी के लिए सडको पनर उतर रही है ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कलक्टर्स का फीडबैक महज कागजी है।
सूरज का पारा चढऩे के साथ ही प्रदेश में जल संकट भी बढने लगा है कहीं पर जनता सडक पर उतर रही ह तो कहीं पर जलदाय विभाग के दफ्तरों पर ताले लगाए जा रहे है प्रमुख सचिव संदीप वर्मा रोज सुबह 10 बजे अधिकारियों की मीटिंग ले रहे है तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी चिंता जताते हुए अधिकारियों की मैराथन बैठक की। जल संकट दूर करने के उपायों पर विचार किया इस बीच सीएमओ ने सभी जिला कलक्टर्स से भी पेयजल की स्थिति पर सभी जिला कलेक्टर्स से फीडबैक मंगाया 33 में से 11 कलेक्टर का दावा है कि उनका यहां कोई समस्या नही नहीं है। झुझुनूं कलेक्टर ने लिखा कि पेयजल की कोई समस्या नहीं है जबकि जोधपुर कलक्टर ने कहा हमारे यहां कोई बडी समस्या नहीं है करौली व कोटा कलकटर की रिपोर्ट भी ऐसी ही आई है। बीकानेर, हनुमानगढ़ कलेक्टर का भी कहना है कि हमारे जिले में पेयजल की कोई समस्या नहीं है। जालौर कलेक्टर कहते है कि कोई समस्या नहीं है जबकि यहां के भीनमाल में चार दिन से पानी आता है। झुझुनूं कलेक्टर को भी पेयजल समस्या नहीं दिख रही है लेकिन खेतडी सहित कई कस्बो में 72 घंटे के अंतराल से पानी सप्लाई हो रहा है।  मामला साफ है कि प्रदेश में पेयजल की जो स्थिति है उसके विपरीत कलक्टर ने अपनी रिपोर्ट सौपी है ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या महज बंद कमरो में कागजी कार्यवाही करके रिपोर्ट तैयार की जा रही है।