नारायणपुर। देश-दुनिया के लिए पहले अबूझ माने जाने वाले विकासखण्ड ओरछा (अबूझमाड़) इलाके में निवासरत आदिवासी ग्रामीण आधुनिकता की दौड़ से कोसों दूर थे। भौगोलिक परिस्थितियों से विषम इस क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव होने के कारण अबूझमाड़िया देश-दुनिया में होने वाली गतिविधियों से अनजान बने रहते थे, लेकिन अब अबूझमाड़ को बूझने के लिए नई पहल शुरू की गई है।

अबूझमाड़ विकास की अंगड़ाइयां ले रहा है। माओवाद प्रभावित अबूझमाड़ सहित दूरस्थ अंचल के इलाकों में मिनी थिएटर कम डेवलपमेंट सेंटर का निर्माण होने लगा है। वहीं स्थानीय आम जनता के लिए आधुनिक व्यायाम शाला (जिम) खोलने का सिलसिला शुरू हो गया है।
अबूझमाड़ियों को लिए स्थानीय युवा ने सरकारी कर्ज लेकर फोटो स्टूडियो के साथ फोटोकापी सेंटर भी खोला है, जहां ग्रामीण अपनी तस्वीर खिंचवाने आने लगे हैं। धुर नक्सल प्रभावित एवं चारों ओर से घने जंगलों, नदी-नालों और पहाड़ों से घिरे जिले के विकासखण्ड ओरछा मुख्यालय में धीरे-धीरे सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया हो रही हैं।

हाल ही में कुमारी किरता ने पहली दवा की दुकान खोली, वहीं कुछ समय पहले स्थानीय युवाओं ने मिलकर ओरछा मार्ट नाम से आधुनिक दुकान खोली। सोनपुर के युवक ने सरकारी कर्ज लेकर जनरल स्टोर खोला है, जहां सभी दैनिक उपयोग की सामग्रियां मिलती हैं।
कभी यहां के लोग साप्ताहिक हाट-बाजार का इंतजार करते थे या सामान खरीदने के लिए 70 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय की ओर देखा करते थे। आवाजाही के भी कोई साधन नहीं थे, लेकिन अब सड़क, पुल-पुलिया के साथ अन्य निर्माण काम तेजी से हो रहे हैं।

आवाजाही पहले से बेहतर हुई है। मुख्यालय नारायणपुर और ओरछा के बीच दिन में लगभग 4-5 बसें चलती हैं। लोग विकास की मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं। पैसे के लेनेदेन के लिए ग्रामीण बैंक भी आने लगे हैं।
बेहतर नेट कनेक्टिविटी के लिए दूरसंचार ने टॉवर खडे किए हैं। पहले से काफी बेहतर नेट कनेक्टिविटी का दावा प्रशासन कर रहा है। बैंक के साथ अन्य सरकारी काम ऑनलाइन हो रहे हैं। ओरछा में अच्छी शिक्षा के लिए छात्रावास-आश्रम के साथ हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित हैं।

नक्सली हिंसा पीड़ित बच्चों के लिए पोटाकेबिन आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जिसमें लगभग 650 बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं। बच्चियों के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय चल रहा है। अंग्रेजी मीडियम में शिक्षा के लिए मुख्यमंत्री डीएव्ही पब्लिक स्कूल भी चल रहा है।
माड़िया जनजाति के बच्चे हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी में बातचीत करने लगे हैं। उनके अभिभावकों के रहनसहन और खान-पान में परिवर्तन की झलक देखने को मिल रही है। बच्चे पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों में भी माड़ का नाम रोशन कर रहे हैं। पोटाकेबिन के बालक-बालिकाओं ने मलखंब में देश की राजधानी सहित विभिन्न प्रदेशों में अच्छा प्रदर्शन किया है। अंडर 14 और अंडर 17 फुटबॉल में भी दो बच्चों का चयन हुआ है ।