वॉशिंगटन । जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना और पुलवामा आतंकी हमले के मास्‍टरमाइंड मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के मुद्दे पर भारत और पाकिस्‍तान के बाद अब चीन और अमेरिका के बीच भी ठन गई है। अमेरिका ने मसूद अजहर के खिलाफ इस कदम को सार्थक बनाने के लिए सभी उपलब्ध रास्ते का उपयोग करने की कसम खाई, लेकिन चीन ने वॉशिंगटन को चेतावनी दी कि यह रवैया दक्षिण एशिया में पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और जटिल बना सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि हम पुष्टि कर सकते हैं कि हमने ब्रिटेन और फ्रांसीसी समर्थन के साथ एक यूएनएससी प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है। अजहर को 1267 अल कायदा प्रतिबंध कमेटी के तहत सूचीबद्ध करने के एक फ्रांसीसी प्रस्ताव पर चीन के अड़ंगा डालने के बाद अमेरिका ने उसे काली सूची में डालने और उसकी यात्रा पर पाबंदी लगाने के लिए 27 मार्च को 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक मसौदा पत्र वितरित किया था।
वहीं चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि चीन इस मुद्दे का उचित हल करने के लिए रचनात्मक और तार्किक रुख अपना रहा है। अमेरिका ने कथित तौर पर कहा था कि वह जैश संस्थापक अजहर को जवाबदेह ठहराने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करेगा। वहीं गेंग ने दावा किया था कि पेचीदा मुद्दे के हल के लिए सकारात्मक प्रगति हुई है और उन्होंने अमेरिका पर उसकी कोशिशों को नाकाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र नियमों और परंपरा के अनुरूप नहीं है तथा यह एक गलत उदाहरण है। उन्होंने कहा ‎कि  हमें आशा है कि इस मुद्दे का आखिरकार उपयुक्त हल हो जाएगा। गेंग ने पुलवामा आतंकी हमले और जम्मू कश्मीर के हालात में जैश की संलिप्तता के बारे में कोई सबूत नहीं मिलने से जुड़े सवाल पर गेंग ने कहा ‎कि कश्मीर में हुई हालिया घटना पर चीन ने अपना रुख बयां कर दिया है। हमें आशा है कि भारत और पाकिस्तान वार्ता करेंगे और बातचीत एवं वार्ता के जरिए लंबित मुद्दों का हल करेंगे।  उल्लेखनीय है कि 14 फरवरी के पुलवामा हमले में जैश की संलिप्तता के बारे में भारत ने 27 फरवरी को दस्तावेज सौंपा था। वहीं पाकिस्तान ने जैश और पुलवामा हमले के बीच किसी तरह का संबंध होने की बात से इनकार किया है तथा भारत से और अधिक सबूत मांगा है।