रायपुर। दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस) सुपरस्पेशलिटी अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टर्स ने 25 साल के युवा को नई जिंदगी दी है। रायपुर के पास एक गांव में रहने वाला जितेंद्र (परिवर्तित नाम) एक सड़क हादसे में बुरी तरह से झुलस गया।

25 जनवरी 2015 को हुए इस हादसे ने मानो जितेंद्र से सब कुछ छीन लिया था। मुंह के साथ दोनों हाथों को आग ने चपेट में लिया था। होंठ के ऊपर का हिस्सा नाक से जुड़ गया था, नाक के दोनों छेद पूरी तरह से बंद हो गए थे। वह मुंह से सांस लेने पर मजबूर था।
करीब चार साल तक एक-एक दिन मौत के सामने काटने वाले जितेंद्र ने डीकेएस में जांच करवाई। प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न की ओपीडी में विभागाध्यक्ष डॉ. दक्षेश शाह ने जांच की। उन्होंने सर्जरी करने का फैसला लिया।

सर्जरी के बाद जितेंद्र अपनी नाक से सांस लेने में सक्षम है और इलाज से संतुष्ट भी है। जितेंद्र के लिए नया रूप किसी चमत्कार से कम नहीं है। वह कहता है कि उसने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी।

अब कहता है कोई हार न मानें। पूरा इलाज आयुष्मान योजना से हुआ है। सर्जरी में डॉ. दक्षेश शाह, डॉ. केएन ध्रुव, डॉ. दयाल, निश्चेतना विभाग से डॉ. दीपक सिंह मौजूद थे।

हमेशा मुंह से सांस लेना हो सकता था खतरनाकडॉक्टर्स की मानें तो हमेशा मुंह से सांस लेने से संक्रमण का खतरा रहता है। खाना अगर गले में या सांस की नली में फंस गया तो उस स्थिति में जान का भी खतरा हो सकता है। एलर्जी और फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है।

नाक की सफाई नहीं हो पाती जिससे सिक्रिशन जमा हो जाता है उससे कान की बीमारी भी मरीज को हो सकती है। फलस्वरूप नाक बंद होने से कान खराब होने यानी सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। नाक बंद होने से खर्राटे और स्लिप एपनिया की प्रॉब्लम हो जाती है।